नोएडा-ग्रेटर नोएडा में विकास की रफ्तार तेज! 8,000 हेक्टेयर में बनेगा इंडस्ट्रियल नोड, रोजगार और निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्ट
Development in Noida-Greater Noida: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से तैयार की जा रही महायोजना और औद्योगिक विकास की योजनाओं में इसे महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है
Development in Noida-Greater Noida: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इंडस्ट्रियल नोड विकसित होगा
Development in Noida-Greater Noida: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से तैयार की जा रही महायोजना और औद्योगिक विकास की योजनाओं में इसे महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इंडस्ट्रियल नोड के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, रोजगार और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
YEIDA की ओर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब 8,000 हेक्टेयर में इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राधिकरण के निदेशक मंडल की ओर से भी इस प्रस्ताव का अवलोकन किया गया है। इसके लिए महायोजना तैयार करने की दिशा में कंसल्टेंट के चयन की कार्रवाई की जा रही है।
प्राधिकरण के मुताबिक, इंडस्ट्रियल नोड के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के आसपास योजनाबद्ध तरीके से औद्योगिक गतिविधियां विकसित होने से क्षेत्र में कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की भी तैयारी
YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ इंटरनेशनल ट्रेड सिटी विकसित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। प्राधिकरण की योजना Yiwu International Trade City की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र विकसित करने की है। प्रस्तावित ट्रेड सिटी में क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी, बिक्री और निर्यात के लिए बाजार उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।
इससे स्थानीय उद्योगों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और वैश्विक व्यापार के अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है। एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ ट्रेड सिटी को जोड़ने की योजना क्षेत्र के कारोबारी ढांचे को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
295 औद्योगिक भूखंडों में तेजी से बढ़ रहा काम
YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने के लिए भूखंड आवंटन के बाद निर्माण और उत्पादन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है। प्राधिकरण के मुताबिक 4,000 वर्गमीटर से अधिक आकार के 295 औद्योगिक भूखंडों में 181 भूखंडों के लीज डीड का निपटारा हो चुका है। इनमें 152 आवंटियों को कब्जा दिया जा चुका है। जबकि 69 भूखंडों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वहीं 13 इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
सेक्टर-28 के मेडिकल डिवाइस पार्क में भी औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां 203 भूखंडों के सापेक्ष 123 भूखंड आवंटित किए गए हैं। इनमें 75 भूखंडों पर कब्जा दिया जा चुका है और 28 पर निर्माण शुरू हो गया है।
आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर
मेडिकल डिवाइस पार्क में 3D Prototype Lab, Electronics Assembly Facility, IoMT, Biomaterial, Common IT Facility और Tooling Room जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी काम चल रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों को जरूरी तकनीकी और साझा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा सेक्टर-29 के अपैरल पार्क में 159, एमएसएमई पार्क में 503 और हैंडीक्राफ्ट पार्क में 188 भूखंडों का आवंटन हो चुका है। अपैरल पार्क में 110 और हैंडीक्राफ्ट पार्क में 83 आवंटियों को कब्जा भी मिल चुका है। सेक्टर-33 के टॉय पार्क में 148 भूखंड आवंटित किए गए हैं।
महायोजना से तय होगी भविष्य की दिशा
YEIDA की ओर से आगरा-अर्बन सेंटर की महायोजना-2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी जारी है। संशोधित महायोजना रिपोर्ट प्राधिकरण की 88वीं बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। प्राप्त सुझावों की जांच के बाद उनके निस्तारण की संस्तुति की गई है। संशोधित ड्राफ्ट महायोजना तैयार की जा रही है, जो क्षेत्र के भविष्य के भूमि उपयोग और विकास की दिशा तय करेगी।
साथ ही औद्योगिक भूखंडों पर निर्माण और उत्पादन की गति बढ़ाने के लिए साप्ताहिक समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से लीज डीड, कब्जा, मानचित्र स्वीकृति, निर्माण और पूर्णता प्रमाण-पत्र से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है।