नई दिल्ली। छठ और दिवाली जैसे त्योहारों में ट्रेन टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। कई रूटों पर पहले से ही लंबी वेटिंग या ‘रिग्रेट’ स्टेटस दिखने लगता है। जिससे पैसेंजर को लगता है कि चार्ट बनने के बाद टिकट नहीं मिल सकता। लेकिन ऐसा नहीं है। रेलवे की करंट बुकिंग के जरिए चार्ट बनने के बाद भी खाली सीट मिलने पर कन्फर्म टिकट बुक किया जा सकता है।
चार्ट बनने के बाद कैसे मिलती है सीट?
चार्ट बनने के बाद अगर कोई सीट खाली रह जाती है, तो वह करंट बुकिंग में मिल सकती है। टिकट कैंसिल होने या किसी कोटे की सीट खाली रहने पर रेलवे उसे सिस्टम में अपडेट करता है। अवेलेबल बर्थ मिलने पर पैसेंजर सीधे कन्फर्म टिकट बुक कर सकता है।
बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे ज्यादा मांग वाले रूटों पर त्योहारों के समय टिकटों पर ‘नो रूम’ या ‘रिग्रेट’ स्टेटस दिख सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाद में कोई सीट नहीं मिल सकती। चार्ट तैयार होने के बाद यदि किसी वजह से सीट खाली होती है, तो वह करंट बुकिंग में अवेलेबल हो सकती है। इसलिए त्योहार के समय जर्नी करने वाले पैसेंजर के लिए चार्ट बनने के बाद अवेलेबिलिटी चेक करना फायदेमंद हो सकता है।
ऐसे वेटिंग नहीं, बल्कि सीधे कन्फर्म होगी टिकट
सामान्य एडवांस बुकिंग में सीटें भरने के बाद वेटिंग या RAC टिकट मिल सकते हैं। इसके उलट करंट बुकिंग में अवेलेबल कन्फर्म बर्थ ही बुक की जाती है। इसका मतलब है कि यदि सिस्टम में सीट अवेलेबल दिख रही है, तो बुकिंग के बाद पैसेंजर को कन्फर्म टिकट मिलता है।
पहला रिजर्वेशन चार्ट कब बनता है?
• सुबह 5:01 बजे से दोपहर 2 बजे - इस बीच चलने वाली ट्रेनों का पहला चार्ट पिछली रात करीब 8 बजे तैयार होता है।
• दोपहर 2:01 बजे से सुबह 5 बजे - इस बीच चलने वाली ट्रेनों का चार्ट ट्रेन के रवाना होने से कम से कम 10 घंटे पहले तैयार किया जाता है।
पहला चार्ट बनने के बाद खाली सीटें करंट बुकिंग में मिल सकती हैं। ट्रेन चलने से करीब 30 मिनट पहले दूसरा चार्ट बनता है। इस दौरान कैंसिल हुई सीटों की जानकारी भी अपडेट होती है। इसलिए पैसेंजर आखिरी समय तक सीट चेक कर सकते हैं।