कोलकाता: दुर्गा पूजा सिर्फ माँ की आराधना नहीं, बल्कि कला और इतिहास को दिखाने का सबसे बड़ा मंच है। इस बार अपने 91वें साल में संतोष मित्रा स्क्वायर ने कुछ ऐसा किया है, जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम और सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। इस बार का पंडाल देश की आजादी और बंटवारे के दर्द को समर्पित है।
