ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच स्थित न्यू दादरी स्टेशन देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (डीएफसीसी) का यह इंटरचेंज स्टेशन अब केवल भारी उद्योगों के माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-कॉमर्स और आम उपभोक्ताओं से जुड़े पार्सल कारोबार में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। पिछले छह वर्षों में यहां से मालगाड़ियों के परिचालन में करीब 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और वितरण केंद्रों के बीच माल की आवाजाही को नई गति मिली है।
22 से बढ़कर 440 ट्रेनें प्रतिदिन
न्यू दादरी स्टेशन पर मालगाड़ियों के परिचालन में आई वृद्धि इसकी बढ़ती उपयोगिता को दर्शाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में यहां औसतन 22 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित होती थीं। वर्ष 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 64 तक पहुंच गई। वर्ष 2022-23 में 170 ट्रेनें प्रतिदिन दर्ज की गईं, जबकि 2023-24 में परिचालन में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2024-25 में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह संख्या 358 ट्रेनें प्रतिदिन हो गईं। वर्ष 2025-26 में आंकड़ा 406 ट्रेनों तक पहुंचा, जबकि 2026-27 में अब तक औसतन 440 ट्रेनों के प्रतिदिन परिचालन का उल्लेख किया गया है। इस तरह छह वर्षों में स्टेशन की परिचालन क्षमता और माल ढुलाई गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर का अहम जोड़
न्यू दादरी की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष महत्व देती है। यह स्टेशन ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो लुधियाना से दानकुनी तक माल परिवहन को जोड़ता है, और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच महत्वपूर्ण इंटरचेंज का काम करता है। इसके माध्यम से उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाला माल पश्चिमी बंदरगाहों और देश के अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
भारी उद्योगों के साथ ई-कॉमर्स को भी सहारा
न्यू दादरी स्टेशन की भूमिका अब पारंपरिक औद्योगिक माल ढुलाई से आगे बढ़ रही है। यहां रोजाना करीब 350 से 400 टन पार्सल का ट्रांजिट होता है। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़ा माल भी शामिल है। स्टेशन पर ज्वाइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस (जेपीआरएस) जैसी सुविधाओं के संचालन से पार्सल परिवहन को बढ़ावा मिला है।
लुधियाना-दानकुनी मार्ग से आने वाला कोयला, स्टील, सीमेंट और कृषि उत्पाद भी इस नेटवर्क के जरिए आगे भेजे जाते हैं। वहीं, एनटीपीसी दादरी पावर प्लांट के लिए समर्पित रेल लाइन से कोयले की आपूर्ति होती है। इसके अलावा एनसीआर के उद्योगों के लिए कच्चे माल, कोल्ड स्टोरेज से जुड़े उत्पादों और तापमान-संवेदनशील वस्तुओं की आवाजाही में भी यह नेटवर्क उपयोगी साबित हो रहा है।
72 घंटे से घटकर 24 घंटे में सफर
माल ढुलाई के समय में कमी इस बदलाव का एक प्रमुख पहलू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले कुछ मार्गों पर माल पहुंचाने में करीब 72 घंटे लगते थे, जबकि अब यह समय घटकर लगभग 24 घंटे रह गया है। कुछ परिस्थितियों में समय 10 से 12 घंटे तक भी बताया गया है। इससे कारोबारियों को माल की समय पर आपूर्ति, भंडारण और वितरण की योजना बनाने में सहूलियत मिलती है। समय की बचत के साथ माल ढुलाई की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
न्यू दादरी में बढ़ता परिचालन देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में फ्रेट कॉरिडोर की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर के बीच यह स्टेशन उद्योग, बंदरगाह, ई-कॉमर्स और उपभोक्ता बाजारों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन रहा है। आने वाले समय में माल परिवहन की बढ़ती मांग के बीच इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट