SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर ECI का जवाब! 'असहमति सामान्य प्रक्रिया…'; 10 महीने के सवालों पर चुनाव आयोग ने क्या-क्या कहा?
ECI response SIR Row: चुनाव आयोग (ECI) ने एक बयान में कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ECI ने कहा कि ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है
SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर 2 EC की आपत्ति के बारे में एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी किया है
ECI response SIR Row: चुनाव आयोग ने पिछले 10 महीनों के दौरान इलेक्शन क (ECI) के भीतर उठाई गई कथित आपत्तियों और अलग-अलग टिप्पणियों को लेकर बुधवार (23 सितंबर) को विस्तृत प्रेस नोट जारी कर विस्तृत जवाब दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। ECI ने कहा कि आयोग संविधान के आर्टिकल 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। उसके सभी कदम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप हैं। SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर 2 चुनाव आयुक्त की आपत्ति के बारे में 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी किया है।
'अलग-अलग राय विमर्श का सामान्य हिस्सा'
चुनाव आयोग ने कहा, "किसी भी संस्था में अंतिम फैसला लेने से पहले अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।" आयोग के मुताबिक, "सिर्फ तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है।" ECI ने कहा कि सदस्यों की ओर से ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल या सुझाव चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
'हर अधिकारी अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है'
चुनाव आयोग ने बयान में कहा, "किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।"
10 महीनों के दौरान क्या-क्या हुआ?
ECI ने कहा, "10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है। हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन (SIR सहित) के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं।"
'सिर्फ कुछ आंतरिक नोट्स से पूरी तस्वीर नहीं बनती'
आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में सामने आए कुछ खास आंतरिक नोट्स और टिप्पणियों को अलग से देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। ECI के मुताबिक, हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल शुरू कीं। इनमें देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण, जिसमें SIR भी शामिल है, जैसे चुनावी सुधार और प्रक्रियाएं शामिल हैं। आयोग ने दावा किया कि पिछले एक साल में लिए गए ये सभी फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
कई राज्यों में चुनाव कराने का भी जिक्र
प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में कराए गए प्रमुख चुनावों का भी उल्लेख किया। आयोग ने कहा कि इन चुनावों के संचालन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और ऑपरेशनल मशीनरी लगी और इस दौरान आयोग की ओर से कई मंजूरियां और निर्देश जारी किए गए।
ECINet और डेटा सुरक्षा पर भी सफाई
डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी आयोग ने अपना पक्ष रखा। ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं, जिनका उद्देश्य अनधिकृत छेड़छाड़ और डेटा में हेरफेर को रोकना है। आयोग ने कहा कि IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस में अपनाए जाने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं।
'संवैधानिक जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध'
प्रेस नोट के अंत में चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है। यह प्रेस नोट चुनाव आयोग के डिप्टी डायरेक्टर पी. पवन की ओर से जारी किया गया है।
अखबार की रिपोर्ट में क्या है?
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि वोटर लिस्ट के SIR के दौरान 10 महीने में 14 बार दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कदमों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद अधिकारियों का यह बयान आया है। अखबार ने खबर दी है कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर ही मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR)र से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए गए। खबर के अनुसार, तीन में से दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई बार इन मुद्दों को उठाया।
अंग्रेजी दैनिक की खबर में कहा गया कि एसआईआर के देशव्यापी क्रियान्वयन की निगरानी तीनों निर्वाचन आयुक्तों की देखरेख में हो रही है। हालांकि, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें उनकी जानकारी के बिना लिया गया या जारी किया गया था। इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गईं। विपक्षी दलों ने एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना की है। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य उन मतदाताओं को निशाना बनाना था, जो BJP और उसके सहयोगी दलों के साथ नहीं हैं।