देश के सबसे बड़े कथित वित्तीय और टैक्स धोखाधड़ी मामलों में से एक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। म्यांमार बॉर्डर से लेकर पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े बहुचर्चित कथित 'अभिषेक टैक्स' (गुंडा टैक्स) और करीब 1500 करोड़ रुपये के विदेशी सुपारी (अरेका नट) तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे अवैध नेटवर्क की तहकीकात के दौरान कई केंद्रीय और राज्य कर अधिकारियों यानी GST और CGST के कई भ्रष्ट अधिकारी भी अब जांच के सीधे दायरे में आ चुके हैं, जिससे टैक्स महकमे में हड़कंप मच गया है।
म्यांमार से लेकर उत्तर भारत तक फैला है तस्करी का सिंडिकेट
ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस द्वारा इस मामले में तफ्तीश को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी और काले धन का यह सिंडिकेट सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लेकर देश के कई राज्यों तक फैला हुआ है। इस सिंडिकेट का रूट मुख्य रूप से इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से होते हुए असम और पश्चिम बंगाल के रास्ते बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान तक जाता है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अवैध सुपारी की खेप को म्यांमार से मिजोरम लाया जाता है और फिर वहां से पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इस अवैध धंधे से जुड़े काले धन के बड़े सिंडिकेट को लेकर अब तक 11 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
धीरज घोष और अन्य आरोपियों पर कसा शिकंजा, गिरफ्तारी की आशंका
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कुछ साल पहले तक कथित तौर पर कुछ राजनेताओं के इशारे पर तस्करों से उगाही करके करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया जाता था, जिसे कथित तौर पर 'अभिषेक टैक्स' कहा जा रहा है। हाल ही में जांच एजेंसी ने धीरज घोष, बिनॉय बर्मन, संदीप बैद और कारोबारी नवरतन बैद सहित अन्य आरोपियों से जुड़े करीब 16 ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया था। जांच का दायरा बढ़ने के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस मामले में मुख्य आरोपी माने जा रहे धीरज घोष की गिरफ्तारी भी जल्द संभव हो सकती है?
राजनीतिक बयानबाजी और 1500 करोड़ रुपये की सुपारी तस्करी का खुलासा
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने इस कथित अवैध तस्करी को लेकर पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ईडी ने हाल ही में करीब 1500 करोड़ रुपये की सुपारी तस्करी के इस बड़े मामले का खुलासा किया था। जांच में यह साफ हो चुका है कि इस अवैध कारोबार को बिना मिलीभगत के चलाना संभव नहीं था। तस्करों द्वारा म्यांमार से लाई जाने वाली सुपारी को देश के भीतर खपाने के लिए कस्टम और टैक्स विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी इनवाइस, नकली ई-वे बिल और जाली ट्रांजिट दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।
कई GST और CGST अधिकारी रडार पर, बढ़ सकती है मुश्किलें
सुपारी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े नेटवर्क की गहराई से पड़ताल के दौरान अब कई GST और CGST अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। जांच एजेंसी के अधिकारी इन सभी से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी इनपुट को तेजी से इकट्ठा कर रहे हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर रडार पर आए अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इस कार्रवाई से कर विभाग के कई भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ गई है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बड़े खुलासे व गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।