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कथित 'अभिषेक टैक्स' और ₹1500 करोड़ के सुपारी तस्करी मामले में ED की जांच तेज, कई GST-CGST अधिकारी भी रडार पर

कथित 'अभिषेक टैक्स' और ₹1,500 करोड़ की सुपारी तस्करी मामले में ईडी का शिकंजा कस गया है। इस अवैध सिंडिकेट और फर्जी बिलों के खेल में कई GST-CGST अधिकारी जांच के दायरे में आ गए हैं।

shankar anandअपडेटेड Oct 22, 2026 पर 5:41 PM
कथित 'अभिषेक टैक्स' और ₹1500 करोड़ के सुपारी तस्करी मामले में ED की जांच तेज, कई GST-CGST अधिकारी भी रडार पर
Abhishek Tax ED investigation

देश के सबसे बड़े कथित वित्तीय और टैक्स धोखाधड़ी मामलों में से एक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। म्यांमार बॉर्डर से लेकर पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े बहुचर्चित कथित 'अभिषेक टैक्स' (गुंडा टैक्स) और करीब 1500 करोड़ रुपये के विदेशी सुपारी (अरेका नट) तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे अवैध नेटवर्क की तहकीकात के दौरान कई केंद्रीय और राज्य कर अधिकारियों यानी GST और CGST के कई भ्रष्ट अधिकारी भी अब जांच के सीधे दायरे में आ चुके हैं, जिससे टैक्स महकमे में हड़कंप मच गया है।

म्यांमार से लेकर उत्तर भारत तक फैला है तस्करी का सिंडिकेट

ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस द्वारा इस मामले में तफ्तीश को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी और काले धन का यह सिंडिकेट सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लेकर देश के कई राज्यों तक फैला हुआ है। इस सिंडिकेट का रूट मुख्य रूप से इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से होते हुए असम और पश्चिम बंगाल के रास्ते बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान तक जाता है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अवैध सुपारी की खेप को म्यांमार से मिजोरम लाया जाता है और फिर वहां से पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इस अवैध धंधे से जुड़े काले धन के बड़े सिंडिकेट को लेकर अब तक 11 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

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