वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को वेरिफिकेशन प्रक्रिया में कुछ बदलावों का ऐलान किया। आयोग ने कहा कि इन कदमों का मकसद वोटरों के लिए जांच और जरूरी दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। ये फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक में लिया गया। आयोग के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने में ज्यादा सुविधा देना है।
नहीं लगाना होगा BLO के चक्कर
आयोग ने कहा कि जिन वोटरों का रिकॉर्ड पुराने डेटा से मैच नहीं हो रहा है या जानकारी में कोई गलती है, उन्हें वेरिफिकेशन के लिए ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे लोगों के घर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जाएंगे, जरूरी दस्तावेज लेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इससे वोटरों के लिए पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी। चुनाव आयोग के नए नियमों के तहत सुनवाई की जरूरत केवल जरूरी मामलों में ही होगी और कोशिश रहेगी कि इसे ऑनलाइन पूरा किया जाए। अगर वोटर खुद मौजूद नहीं हो सकता, तो उसकी ओर से परिवार का कोई अधिकृत सदस्य भी सुनवाई में शामिल हो सकेगा।
SIR के लिए हेल्प डेस्क बनाने को कहा
चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं की मदद के लिए खास इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं, जिन्हें SIR की प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है। इसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष कैंप और हेल्प डेस्क लगाने को कहा गया है। इन केंद्रों पर नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीब और बेघर मतदाताओं को जरूरी जानकारी और सहायता दी जाएगी, ताकि वे आसानी से वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर सकें।
बढ़ाई गई नोटिस की समयसीमा
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए समय बढ़ा दिया है। दिल्ली में अब 30 अक्टूबर 2026 तक क्लेम और ऑब्जेक्शन किए जा सकेंगे, वहीं उनका निपटारा 30 नवंबर तक होगा। महाराष्ट्र में लोग 12 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दे सकेंगे और इनके निपटारे की आखिरी तारीख 10 नवंबर 2026 है। दोनों राज्यों को चुनाव आयोग ने SIR के एक ही चरण में शामिल किया है।
चुनाव आयोग के अनुसार, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा हो चुका है। अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है, तो वह लगातार अपडेट की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम जुड़वा सकता है। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग के वोटर पोर्टल पर पुराने वोटर रिकॉर्ड में नाम देखने और SIR से जुड़े नोटिस के जवाब में जरूरी दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। SIR को लेकर सवालों के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को सभी सदस्यों की मंजूरी मिली थी।
आयोग के मुताबिक, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में प्रक्रिया को पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया गया।
ECINet सिस्टम की होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने ECINet सिस्टम की समीक्षा करने का फैसला लिया है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि यह चुनावी नियमों के अनुसार सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। ECINet के जरिए फिलहाल पुराने वोटर रिकॉर्ड देखने और SIR से जुड़े नोटिस का जवाब देने जैसे कई काम किए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया और फॉर्म 6 से जुड़े नियमों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान फॉर्म 6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने मान्य माना है। वहीं SIR के अलावा सामान्य अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए 1960 के नियमों के तहत तय फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।