'चुनाव आयोग में खत्म हुआ महीनों पुराना विवाद? EC ने जारी किया नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर, जानें पूरा मामला

ECI Fresh Work Allocation Order: चुनाव आयोग के भीतर छिड़ी अंदरूनी जंग की खबर ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी थी। बिना आयोग की सहमति के अचानक बदले गए विभागों और कैबिनेट सचिव तक पहुंचे पत्रों ने इस हाई-प्रोफाइल विवाद को और हवा दे दी थी। अब ECI ने नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर जारी कर दिया है। कैबिनेट सचिव तक पहुंचे इस हाई-प्रोफाइल विवाद और आयोग के नए प्रशासनिक ढांचे की पूरी रिपोर्ट जानिए

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 12:00 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
चुनाव आयोग के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हुए हैं और एक नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ने पदभार संभाला है

ECI Fresh Work Allocation Order: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आंतरिक जिम्मेदारियों और विभागों के बंटवारे को लेकर जारी नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर पास कर दिया है। 4 नवंबर को जारी यह आदेश चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी द्वारा जुलाई में उठाए गए ऐतराज और आंतरिक विवाद के बाद पहला आधिकारिक लिखित कदम है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए आदेश के जरिए प्रशासनिक, आईटी और जन शिकायत निवारण (PGRS) से जुड़ी मुख्य जिम्मेदारियों का फिर से औपचारिक वितरण कर दिया गया है। आइए आपको बताते हैं चुनाव आयोग के इस नए आदेश और जुलाई से चले आ रहे विवाद से जुड़ी हर एक डिटेल।

क्या था जुलाई 2026 का पूरा विवाद?


चुनाव आयोग में इस अंदरूनी विवाद की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को जारी एक विवादित आदेश से हुई थी। इससे पहले 23 सितंबर 2025 के आदेश के तहत आईटी, जन शिकायत (PGRS) और वोटर लिस्ट की जिम्मेदारी डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) संजय कुमार के पास थी और महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना अपनी फाइलें उनके जरिए ही आयोग को भेजती थीं।

वैसे 28 जुलाई को तत्कालीन कार्यवाहक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने नया आदेश जारी कर आईटी और PGRS का प्रभार संजय कुमार से छीनकर सीधे सीमा खन्ना को सौंप दिया, जिससे उनका सीधा रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर आयोग से जुड़ गया।

इस अचानक बदलाव पर चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने कड़ा ऐतराज जताया और 29 जुलाई को सीधे कैबिनेट सचिव को पत्र लिख दिया। दोनों आयुक्तों ने काम के बंटवारे, रोस्टर और आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि तय परंपरा के अनुसार वर्क एलोकेशन का कोई भी फैसला पूरे चुनाव आयोग की सहमति और मंजूरी के बाद ही लागू होता है, जबकि इस मामले में स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन किया गया था।

विवाद के बाद क्या कदम उठाए गए?

चुनाव आयुक्तों के विरोध के बाद 28 जुलाई का आदेश रोक दिया गया। सीमा खन्ना को फिर से DEC संजय कुमार के जरिए फाइलें आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए, हालांकि इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था। जुलाई विवाद के करीब एक महीने बाद, DoPT के आदेश से DEC संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया।

क्यों जरूरी है 4 नवंबर का नया ऑर्डर?

हाल के हफ्तों में चुनाव आयोग के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हुए हैं और एक नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ने पदभार संभाला है। नए अधिकारियों के आने और संजय कुमार के जाने के बाद विभागों के स्पष्ट बंटवारे के लिए एक नया लिखित आदेश जरूरी हो गया था। 4 नवंबर के इस आदेश ने जुलाई विवाद के बाद बने असमंजस को खत्म कर दिया है और सभी वरिष्ठ अधिकारियों के काम और रिपोर्टिंग लाइन को पूरी तरह तय कर दिया है।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।