नशे की लत से इंसान की सेहत, रिश्तों और रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर देती है। नशे का मारा इंसान काबिल होते हुए एक समय पर सबकुछ हार जाता है। लेकिन समय पर इलाज और परिवार का साथ हो तो वही इंसान अपने जीवन का नया अध्याय भी लिख सकता है। नशे की लत से उबरने से इंसान को स्थिरता पाने और एक सेहतमंद भविष्य की ओर कदम बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बिहार के दरभंगा जिले के 28 साल के ग्रेजुएट राजवीर (नाम बदला हुआ) को रोशनी आईआरसीए में इलाज और पुनर्वास सहयोग मिला। इससे वह नशे की लत उबर सके और अब अपने परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने परिवार के सहयोग से एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया है। नशे की लत ने उनके व्यवहार, भावनात्मक सेहत और पारिवारिक जिंदगी पर असर डाला था।
उनके व्यवहार और भावनात्मक हालत में बदलाव से परेशान होकर, राजवीर के पिता उन्हें 8 मार्च 2026 को आईआरसीए केंद्र ले आए। राजवीर शुरू में चिड़चिड़े थे और उन्हें इलाज के माहौल में एडजस्ट करने में मुश्किल हो रही थी। जब तक उन्हें प्रोफेशनल देखभाल मिलनी शुरू हुई, उनका परिवार साथ देता रहा।
रोशनी आईआरसीए में, राजवीर को मेडिकल डिटॉक्सिफिकेशन, नियमित दवा, निजी काउंसलिंग, ग्रुप थेरेपी, री-एजुकेशनल सेशन और योग आदि गतिविधियां करने को मिलीं। केंद्र ने परिवार परामर्श, होम विजिट और फॉलो-अप सहयोग भी दिया। जैसे-जैसे इलाज आगे बढ़ा, उसने काउंसलिंग सेशन के दौरान अपनी परेशानियां और खुलकर साझा करना शुरू कर दिया।
परिवार ने उसके व्यवहार में अच्छे बदलाव देखे। राजवीर रोजाना के कामों में अधिक व्यस्त हो गया और उनकी मदद से उसने एक छोटा सा कारोबार शुरू किया। सेंटर के जागरूकता कार्यक्रम और लगातार दखल ने भी उसके परिवार को ठीक होने में मदद की। आज, राजवीर अपने परिवार के साथ रह रहा है और एक स्वस्थ, नशा-मुक्त जीवन जीने की कोशिश कर रहा है। उसका अनुभव दिखाता है कि इलाज, काउंसलिंग और परिवार का साथ ठीक होने में मदद कर सकता है। साथ ही, इससे वे अपनी नियमित जिंदगी और रोजगार फिर से शुरू कर सकते हैं।