Maharashtra hostel: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में प्रशासन एक असाधारण संकट से जूझ रहा है। यहां एक सरकारी रेजिडेंशियल स्कूल के हॉस्टल को छोड़कर करीब 600 आदिवासी छात्र चले गए हैं। उनका दावा है कि कुछ छात्राओं पर भूत-प्रेत का साया है। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना की शुरुआत 22 जुलाई को तब हुई, जब चार छात्राओं ने अचानक अजीब व्यवहार करना शुरू कर दिया। वे बेकाबू होकर रोने और हंसने लगीं। आशंका है कि यह स्थिति मानसिक तनाव से जुड़ी हो सकती है।
600 छात्रों ने 'भूतिया' हॉस्टल को कहा अलविदा
अधिकारियों ने रविवार (16 अगस्त) को बताया कि मुंबई से 700 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित उत्तरी महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के चिखलदरा तहसील के डोमा गांव में इस आदिवासी रेजिडेंशियल स्कूल में 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही यह अफवाह फैल गई कि छात्राएं ऊपरी साये के असर में हैं, जिसके कारण कुछ ही दिनों के भीतर करीब 600 छात्रों ने इस कथित 'भूतिया' हॉस्टल को छोड़ दिया। यह हॉस्टल आदिवासी विकास विभाग द्वारा चलाया जाता है।
हॉस्टल के एक सूत्र के अनुसार, कुछ छात्राओं ने घुंघरुओं के खनकने की आवाजें सुनाई देने का भी दावा किया था। आदिवासी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक दल ने डोमा आवासीय विद्यालय का दौरा किया है। अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, "इन लक्षणों का किसी भी अलौकिक या अंधविश्वास वाली गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। यह मानसिक तनाव से जुड़ी एक चुनिंदा हिस्टीरिया (मिरगी जैसा मानसिक दौरा) जैसी स्थिति हो सकती है।"
अजीब व्यवहार के बाद डर का साया
प्रशासन द्वारा तैयार की गई एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्राओं के इस अजीब व्यवहार के बाद कई तरह की बातें सामने आने लगीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी इसी तरह के मानसिक लक्षण विकसित हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच एक धारणा यह फैली कि जहां आश्रम स्कूल बना है, वहां पहले 'महुआ' का एक पेड़ हुआ करता था, जिस पर आत्माओं का वास था। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने उस पेड़ को काट दिया, जिससे गुस्सा होकर आत्माएं छात्रों को परेशान कर रही हैं।
एक और कारण यह बताया गया कि आश्रम स्कूल के पीछे स्थित स्थानीय आदिवासियों के देवता का मंदिर विद्यालय के नाले के कारण प्रभावित या अतिक्रमित हो गया था, जिससे देवता नाराज हो गए थे। वहीं, तीसरे कारण के रूप में यह अफवाह फैली कि स्कूल के पास के खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हो गई थी, जिसकी आत्मा भूत बनकर वहां भटक रही है। आदिवासी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने डोमा रेजिडेंशियल स्कूल का दौरा किया। एक अधिकारी ने कहा कि यह मानसिक तनाव से जुड़ी हिस्टीरिया जैसी स्थिति हो सकती है।
रिपोर्ट में इस असामान्य स्थिति का मुख्य कारण अंधविश्वास, डर, तनाव और आत्माओं के संबंध में स्थानीय मान्यताओं को बताया गया है। अधिकारी ने बताया कि अंधविश्वास उन्मूलन के लिए काम करने वाली संस्था 'महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी छात्रों से मुलाकात कर उन्हें समझाया। समिति ने लोगों से अपील की है कि वे अंधविश्वासों के बहकावे में न आएं और इस घटना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें।
अमरावती से सांसद बलवंत वानखेड़े ने भी छात्रों से न डरने और दोबारा स्कूल जाना शुरू करने की अपील की है। स्कूल के हेडमास्टर संजय चौधरी ने बताया कि छात्राओं को समझाने और उन्हें वापस स्कूल लाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा, "कुछ विद्यार्थी वापस लौट आए हैं।"