किसी कंपनी को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने का असर उसके कामकाज के साथ-साथ फाउंडर की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। एग्रीटेक फाउंडर हरीश वरदराजन ने चेन्नई से बेंगलुरु शिफ्ट होने के एक साल बाद अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। उनका कहना है कि इस बदलाव से उन्हें बिजनेस और प्राइवेट लाइफ, दोनों में फायदा मिला।
वरदराजन ने LinkedIn पर बताया कि बेंगलुरु आने के बाद कस्टमर, इन्वेस्टर्स और स्टार्टअप से जुड़े लोगों तक पहुंच आसान हुई। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में काम करने की कॉस्ट कम रखने में मदद मिली। वह कहते है कि पिछले एक साल में बेंगलुरु उनकी उम्मीद से बेहतर रहा।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में बेंगलुरु उनकी उम्मीद से बेहतर रहा। पिछले 10 साल में वह दुनिया के पांच शहरों में रह चुके हैं। उन्हें बेंगलुरु का मौसम भी काफी पसंद आया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में चेन्नई से बेंगलुरु शिफ्ट होने को अपने प्राइवेट और प्रोफेशनल लाइफ का सबसे अच्छा फैसला बताया। वह आगे कहते है कि बेंगलुरु में अच्छे और महंगे फलों का बड़ा बाजार है। इससे उनके एग्रीटेक बिजनेस को फायदा हुआ।
वरदराजन की पोस्ट पर दूसरे फाउंडर्स ने भी अपने एक्सपीरियंस बताए। एक फाउंडर ने कहा कि मुंबई से बेंगलुरु आने के बाद उन्हें इम्प्लॉई हायरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टमर्स और इन्वेस्टर्स तक पहुंच में फायदा मिला।
एग्री और फूड बिजनेस के लिए नासिक भी अच्छा ऑप्शन है। यहां खेती के साथ फल और सब्जियों का बड़ा बाजार है और मौसम भी खेती के लिए सही है। वह कहते है कि बेंगलुरु में स्टार्टअप और इन्वेस्टमेंट के मौके ज्यादा हैं, लेकिन एग्री-बिजनेस के लिए नासिक भी काम का शहर हो सकता है।