Go-Delhi Foundation: दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गो-दिल्ली फाउंडेशन बनाने को मंजूरी दी गई। इसके लिए ₹50 करोड़ का फंड स्थापित किया जाएगा, जिसका मकसद युवा इनोवेटर्स और सटार्टअप को बढ़ावा देना होगा। इस फंड से आइडिया को प्रोडक्ट में बदलने और उन्हें बाजार तक ले जाने में मदद मिलेगी। दिल्ली में लगभग 21,000 स्टार्टअप हैं जिन्हें डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) से मान्यता मिली है।
इस फाउंडेशन का मकसद राजधानी में स्टार्टअप, इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। साथ ही युवाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को उनके आइडिया को वास्तपिक उत्पाद और सफल एंटरप्राइज में बदलने के लिए एकीकृत सहयोग देना है। सरकार ने फाउंडेशन के लिए ₹50 करोड़ का शुरुआती बजट भी तय किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि गो-दिल्ली फाउंडेशन के जरिए, इन स्रोतों को एक मंच पर लाया जाएगा, जिसका फोकस नए उद्यम को विकसित करने, निवेश लाने और रोजगार के मौके बनाने पर होगा।
गुप्ता ने कहा कि फाउंडेशन स्टार्टअप्स और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइपिंग, लैब्स और टेस्टिंग फैसिलिटीज तक पहुंचने में मदद करेगा। यह तकनीकी सहायता, मेंटरशिप, इनक्यूबेशन, बिजनेस सपोर्ट और इन्वेस्टर्स से जुड़ने के मौके भी देगा, जिससे शुरुआती स्टेज के आइडियाज को मार्केट के लिए तैयार प्रोडक्ट्स में बदलने में मदद मिलेगी।
यह पहल प्रोडक्ट डेवलपमेंट और टेस्टिंग से लेकर सर्टिफिकेशन की तैयारी और मार्केट एक्सेस तक, अलग-अलग चरणों पर उद्यमियों का सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि इसका मकसद अलग-अलग जरूरतों के लिए बिखरी हुई सुविधाओं पर निरर्भता कम करना और दिल्ली में एंटरप्राइजेज को स्थापित करना और बढ़ाना आसान बनाना है।
गुप्ता ने कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट्स फाउंडेशन के जरिए दिल्ली के इनोवेटर्स के सामने अपनी असल दुनिया की चुनौतियां ला पाएंगे। इन चुनौतियों से निपटने के लिए डेवलप किए गए प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजीज को पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए टेस्ट किया जा सकता है, और सफल सॉल्यूशंस को अपनाने के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।