गुरुग्राम: दिल्ली-NCR में अब सांस लेना मुश्किल हो चुका है, जिसकी वजह से अब प्रशासन भी एक्शन में आ गया है। Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में बढ़ते एयर पॉल्यूशन को देखते हुए जिला प्रशासन ने दो बड़े फैसले लिए हैं। जिसमें 5 नवंबर से सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही जिले भर में कंस्ट्रक्शन और तोड़फोड़ से जुड़े सभी कामों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। प्रशासन का साफ कहना है कि लोगों की सेहत सबसे पहले है।
कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य
प्रशासन के नए आदेश के मुताबिक, अब किसी भी दफ्तर में एक साथ 100% स्टाफ नहीं आएगा। 50% कर्मचारियों को घर से ही काम करना होगा और बाकी 50% ऑफिस से काम संभालेंगे। यह नियम 5 नवंबर से लागू हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सड़कों पर रोजाना आने-जाने वाली गाड़ियों की संख्या आधी हो जाएगी, जिससे गाड़ियों के धुएं से होने वाला प्रदूषण काफी हद तक कम होगा।
कंस्ट्रक्शन साइटों से उड़ने वाली धूल पर रोक
प्रदूषण का दूसरा बड़ा कारण धूल है। इसे देखते हुए प्रशासन ने उन सभी कामों पर रोक लगा दी है जिनसे धूल उड़ती है। इसमें नई बिल्डिंग बनाना, मिट्टी की खुदाई करना, मलबा हटाना और किसी पुरानी इमारत को तोड़ना शामिल है।
अक्सर कंस्ट्रक्शन साइट से उड़ने वाली धूल पूरे इलाके की हवा को खराब कर देती है। इसी वजह से 5 नवंबर से अगले आदेश तक इस तरह के किसी भी काम की इजाजत नहीं होगी।
नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
प्रशासन ने सभी कंपनियों, बिल्डरों और आम लोगों से अपील की है कि वह इस नियम का सख्ती से पालन करें। आदेश का पालन न करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल यह देखना होगा कि इन सख्त कदमों से गुरुग्राम की हवा में कितना सुधार होता है।
साफ है कि दिल्ली-NCR की खराब हवा को देखते हुए गुरुग्राम में उठाए गए ये कदम काफी अहम हैं। 50% वर्क फ्रॉम होम और कंस्ट्रक्शन पर बैन से रोजमर्रा के कामों में थोड़ी परेशानी जरूर आएगी, लेकिन लंबे समय में इसका फायदा लोगों की सेहत को ही होगा। अब यह देखना है कि इन फैसलों के बाद आने वाले दिनों में AQI में कितना सुधार देखने को मिलता है।