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'हनुमान अंश' ने 56वें दिन भी कमा लिए इतने करोड़! क्या आप भूमियाधार के उस फेमस झरने को जानते हैं जहां का पानी पीते थे नीम करौली बाबा?

बाबा नीब करौली की फिल्म ने 56वें दिन 2.85 करोड़ का बिजनेस किया है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ रही है। इस बीच आपको भूमियाधार जगह के बारे में बताते हैं, जो बाबा से जुड़ी हुई है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Oct 02, 2026 पर 5:56 PM
'हनुमान अंश' ने 56वें दिन भी कमा लिए इतने करोड़! क्या आप भूमियाधार के उस फेमस झरने को जानते हैं जहां का पानी पीते थे नीम करौली बाबा?
नैनीताल जिले में भवाली-भीमताल-नैनीताल मार्ग के बीच स्थित भूमियाधार का संबंध परम पूज्य बाबा नीम करौली महाराज की आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ा जाता है।

अपने चमत्कारों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध बाबा नीब करौली महाराज का देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके उनकी आध्यात्मिक यात्रा के महत्वपूर्ण केंद्र बने। इन्हीं महत्वपूर्ण केंदों में शामिल है नैनीताल की ठीक करीब पड़ने वाला भूमियाधार। ये केंद्र कई श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय रहा है।

लोकल 18 के रिपोर्टर शैलेंद्र सिंह नेगी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भूमियाधार को बाबा का शुरुआती महत्वपूर्ण आश्रम बताया गया है, जो कैंची धाम से पहले के समय से जुड़ा है। मान्यताओं और बाबा के बारे में चर्चित किस्सों पर यकीन करें तो बाबा भूमियाधार का पानी नियमित रूप से पीते थे। बाबा नीब करौरी महाराज जिस जलधारा का पानी पीते थे उससे लोगों की आस्था आज भी जुड़ी हुई है। ग्रामीणों की मान्यता है कि इस पानी को पीने से किसी भी तरह के रोग नहीं होते।

स्थानीय निवासी किशोरी लाल का दावा है कि उन्होंने बाबा जी को सबसे पहले नौ वर्ष की उम्र में देखा था। यह साल 1951-52 की बात रही होगी। उनका दावा है कि उन्हीं के सामने उनके बुजुर्गों ने बाबा जी के कहने पर भूमियाधार में मंदिर की स्थापना की। बाबा जब भी इस इलाके में रहते थे, तो इस मंदिर के ठीक ऊपर जंगल में मौजूद एक जल स्रोत का पानी ही पिया करते थे।

आज लोग उसे जल स्रोत तक नहीं जाते, क्योंकि वहां से एक पाइप के जरिए पानी को मंदिर के ठीक सामने लाया गया है। जहां से पूरे गांव को इस पानी की सप्लाई होती है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक बाबा नीब करौरी महाराज जब कैंची धाम में भी रहते थे तब भी घोड़े के जरिए यही से उनके पीने का पानी जाया करता था। उनके भक्त उनके लिए पानी का प्रबंध किया करते थे।

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