हरिद्वार: हर की पैड़ी पर गंगा की धारा थमी तो जागी उम्मीद! सूखी रेत में खजाना तलाश रहे भक्त, सोने-चांदी की तलाश में लोगों की भारी भीड़
Haridwar Ganga News: उत्तराखंड स्थित मां गंगा के दर्शन और मशहूर 'हर की पैड़ी' पर स्नान करने की इच्छा लेकर हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जिस हर की पैड़ी पर आमतौर पर गंगा की कलकल करती धारा और श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देती है, वहां पानी का प्रवाह काफी कम हो गया है। सफाई और मरम्मत के लिए करीब 18 दिनों तक नहर का पानी रोका गया है
Haridwar News: उत्तराखंड की धर्मिक नगरी हरिद्वार स्थित 'हर की पैड़ी'… वह पवित्र स्थान, जहां मां गंगा के दर्शन और एक डुबकी लगाने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। आम दिनों में यहां गंगा की लहरों के बीच आस्था का सैलाब उमड़ता है। लेकिन इन दिनों तस्वीर कुछ अलग है। गंगा की धारा थमी हुई है। पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं की रौनक कम है। लेकिन सूखी रेत और पत्थरों के बीच स्थानीय लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। ये लोग यहां गंगा स्नान करने नहीं, बल्कि उस खजाने की तलाश में पहुंचे हैं, जिसे श्रद्धालु सालभर मां गंगा को अर्पित करते रहते हैं। किसी की नजर सिक्कों पर है, तो कोई सोने-चांदी के गहने मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।
इस नजारे के पीछे सिर्फ कौतूहल नहीं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी की कहानी भी छिपी है। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है। बल्कि हरिद्वार में हर साल गंगा नहर बंद होने से सिक्कों, सोने और चांदी के गहनों की एक अजीब खोज शुरू हो जाती है। इस बार भी हजारों लोग भक्तों द्वारा छोड़ी गई कीमती चीज़ों के लिए नदी के खुले हिस्से में खोज कर रहे हैं।
गंगनहर बंद होते ही शुरू हो जाती है खजाने की तलाश
दरअसल, हरिद्वार में दशहरे के आसपास उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ऊपरी गंगनहर की वार्षिक बंदी करता है। इस दौरान नहर की सफाई, गाद निकालने, मरम्मत और घाटों से जुड़े जरूरी काम किए जाते हैं। इस साल 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से गंगनहर (gangnahar) का जलप्रवाह रोका गया है। इसे 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद दोबारा शुरू किए जाने की योजना है। इसी कारण हर की पैड़ी सहित कई स्थानों पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। गंगा में सामान्य दिनों के दौरान तेज बहाव के कारण सिक्के और दूसरी वस्तुएं तलाशना मुश्किल होता है। लेकिन पानी कम होने पर नदी की तलहटी और रेत में पड़ी चीजें दिखाई देने लगती हैं। यही वह समय है, जब सिक्के और धातु की वस्तुएं तलाशने वाले लोग घाटों पर पहुंचने लगते हैं।
किसी के हाथ सिक्के, तो किसी को मिल जाते हैं कीमती गहने
'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा बंदी के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में लोग सिक्के और दूसरी धातुओं की वस्तुएं तलाशने उतरते हैं। कुछ लोग घंटों तक रेत और पत्थरों के बीच जेवरों की तलाश करते हैं। कई बार उन्हें कुछ सिक्के मिलते हैं। जबकि किस्मत साथ दे तो किसी के हाथ अंगूठी या दूसरी धातु की कोई वस्तु भी लग सकती है। हालांकि, हर किसी को कीमती सामान मिल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। यह मेहनत और अनिश्चितता से जुड़ा काम है। किसी को दिनभर की तलाश के बाद कुछ सिक्के ही मिलते हैं, तो किसी को उम्मीद से ज्यादा हासिल हो जाता है। यही अनिश्चितता इस काम को करने वाले लोगों को हर साल गंगा बंदी के समय यहां खींच लाती है।
सिर्फ खजाने की तलाश नहीं, गरीब परिवारों की आजीविका भी
इस कहानी का सबसे भावुक पहलू उन लोगों की जिंदगी है, जिनके लिए गंगा बंदी कमाई का एक अवसर बन जाती है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ परिवारों के लिए सिक्के और धातु की वस्तुएं तलाशना एक्स्ट्रा आमदनी का साधन है। हरिद्वार में गंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है। इसके आसपास बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी भी चलती है। पंडित जी, तीर्थ पुरोहित, फूल-माला और प्रसाद बेचने वाले दुकानदार श्रद्धालुओं के आने से कमाई करते हैं। लेकिन जब गंगा का प्रवाह कम हो जाता है और घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या घटती है, तो इनकी आजीविका भी प्रभावित होती है। ऐसे समय में सिक्के बीनने वालों के लिए सूखी तलहटी कमाई की एक उम्मीद बन जाती है।
गंगा सूखने की वजह क्या है?
हर की पैड़ी पर पानी कम होने की वजह गंगा का हमेशा के लिए सूख जाना नहीं। बल्कि गंगनहर की वार्षिक बंदी है। इस अवधि में सिंचाई विभाग सफाई और मरम्मत के काम करता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस बार आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े कुछ कार्य भी किए जा रहे हैं। हालांकि, जलप्रवाह कम होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग गंगा स्नान की उम्मीद लेकर हरिद्वार पहुंचे। लेकिन उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिला। इसी बीच सूखी तलहटी में सिक्के तलाशते लोगों की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में आ गए हैं।
हालांकि, नहर को बंद करना सिर्फ नियमित मरम्मत का मामला नहीं है! हरिद्वार में होने वाले आगामी 'अर्ध कुंभ मेले' की तैयारियों के मद्देनजर, अधिकारी इस 18 दिनों की बंदी का इस्तेमाल स्थायी और अस्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के लिए कर रहे हैं। कई विभाग इस बड़े धार्मिक आयोजन से पहले सुधार कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या 7-8 नवंबर को पानी की आपूर्ति बहाल होने से पहले मरम्मत और तैयारियां पूरी हो जाएंगी।
18 दिन तक थमेगी गंगा की धारा, मायूस होंगे श्रद्धालु!
अधिकारियों द्वारा 'अपर गंगा नहर' को 18 दिनों के लिए बंद कर दिए जाने के बाद जलस्तर काफी गिर गया है। सालाना रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए नहर को बंद किए जाने से इसके कई हिस्से सूख गए हैं, जिससे पवित्र जल के दर्शन के लिए आए श्रद्धालु निराश हैं। अधिकारियों का कहना है कि दिवाली से ठीक पहले, 7 और 8 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास पानी का बहाव फिर से सामान्य होने की उम्मीद है।