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हरिद्वार: हर की पैड़ी पर गंगा की धारा थमी तो जागी उम्मीद! सूखी रेत में खजाना तलाश रहे भक्त, सोने-चांदी की तलाश में लोगों की भारी भीड़

Haridwar Ganga News: उत्तराखंड स्थित मां गंगा के दर्शन और मशहूर 'हर की पैड़ी' पर स्नान करने की इच्छा लेकर हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जिस हर की पैड़ी पर आमतौर पर गंगा की कलकल करती धारा और श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देती है, वहां पानी का प्रवाह काफी कम हो गया है। सफाई और मरम्मत के लिए करीब 18 दिनों तक नहर का पानी रोका गया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Oct 24, 2026 पर 11:23 PM
हरिद्वार: हर की पैड़ी पर गंगा की धारा थमी तो जागी उम्मीद! सूखी रेत में खजाना तलाश रहे भक्त, सोने-चांदी की तलाश में लोगों की भारी भीड़

Haridwar News: उत्तराखंड की धर्मिक नगरी हरिद्वार स्थित 'हर की पैड़ी'… वह पवित्र स्थान, जहां मां गंगा के दर्शन और एक डुबकी लगाने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। आम दिनों में यहां गंगा की लहरों के बीच आस्था का सैलाब उमड़ता है। लेकिन इन दिनों तस्वीर कुछ अलग है। गंगा की धारा थमी हुई है। पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं की रौनक कम है। लेकिन सूखी रेत और पत्थरों के बीच स्थानीय लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। ये लोग यहां गंगा स्नान करने नहीं, बल्कि उस खजाने की तलाश में पहुंचे हैं, जिसे श्रद्धालु सालभर मां गंगा को अर्पित करते रहते हैं। किसी की नजर सिक्कों पर है, तो कोई सोने-चांदी के गहने मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।

इस नजारे के पीछे सिर्फ कौतूहल नहीं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी की कहानी भी छिपी है। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है। बल्कि हरिद्वार में हर साल गंगा नहर बंद होने से सिक्कों, सोने और चांदी के गहनों की एक अजीब खोज शुरू हो जाती है। इस बार भी हजारों लोग भक्तों द्वारा छोड़ी गई कीमती चीज़ों के लिए नदी के खुले हिस्से में खोज कर रहे हैं।

गंगनहर बंद होते ही शुरू हो जाती है खजाने की तलाश

दरअसल, हरिद्वार में दशहरे के आसपास उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ऊपरी गंगनहर की वार्षिक बंदी करता है। इस दौरान नहर की सफाई, गाद निकालने, मरम्मत और घाटों से जुड़े जरूरी काम किए जाते हैं। इस साल 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से गंगनहर (gangnahar) का जलप्रवाह रोका गया है। इसे 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद दोबारा शुरू किए जाने की योजना है। इसी कारण हर की पैड़ी सहित कई स्थानों पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। गंगा में सामान्य दिनों के दौरान तेज बहाव के कारण सिक्के और दूसरी वस्तुएं तलाशना मुश्किल होता है। लेकिन पानी कम होने पर नदी की तलहटी और रेत में पड़ी चीजें दिखाई देने लगती हैं। यही वह समय है, जब सिक्के और धातु की वस्तुएं तलाशने वाले लोग घाटों पर पहुंचने लगते हैं।

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