Heatwave Alert: भीषण गर्मी से गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ा खतरा, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
Heatwave Alert: दुनियाभर में बढ़ती भीषण गर्मी अब सिर्फ रोजमर्रा की परेशानी नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। एक सर्वे में 73% स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिलाओं में गर्मी से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी, जबकि 76% ने भ्रूण या नवजात स्वास्थ्य पर इसका असर बढ़ने की बात कही है।
Heatwave Alert: एक सर्वे में गर्भवती महिलाओं और नवजातों को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है
Heatwave Alert: भारत समेत दुनियाभर में बढ़ता तापमान अब गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के हेल्थ के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। 'Wellcome' की ओर से कराए गए एक नए ग्लोबल सर्वे में सामने आया है कि स्वास्थ्यकर्मी पिछले कुछ वर्षों में गर्भावस्था और नवजात शिशुओं से जुड़ी गर्मी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी देख रहे हैं। भारत समेत पांच देशों के 1,000 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों को शामिल कर किए गए इस सर्वे में करीब तीन-चौथाई स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्मी से जुड़ी जटिलताओं में वृद्धि की बात कही है।
73% ने गर्भवती महिलाओं में बढ़ती गर्मी से जुड़ी समस्याएं देखीं
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में पाया गया कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, ब्रिटेन और जिम्बाब्वे में सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करने वाले गर्मी से संबंधित मामलों या अत्यधिक गर्मी से जुड़ी जटिलताओं में वृद्धि हुई है। यह सर्वेक्षण वैश्विक परोपकारी संस्था 'वेलकम' के कहने पर कराया गया था। इसे सोमवार 5 अक्टूबर को जारी किया गया।
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने एक बयान में कहा, "आज सामने आए नए आंकड़े... बेहद महत्वपूर्ण और गहरी चिंता पैदा करने वाले हैं। तस्वीर स्पष्ट और बेहद चिंताजनक है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, गर्भावस्था और प्रसव अब वैश्विक जलवायु संकट का एक नया गंभीर क्षेत्र बन गए हैं, जिसका संभावित रूप से घातक असर हो सकता है।"
भ्रूण और नवजात शिशुओं को अधिक खतरा
पांच में से चार से अधिक प्रतिभागियों (81 फीसदी) ने चिंता या गहरी चिंता जताई कि यदि अधिक कदम नहीं उठाए गए तो अत्यधिक गर्मी से माताओं, भ्रूण और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य तेजी से खतरे में पड़ सकता है। सर्वे में पाया गया कि लगभग सभी प्रतिभागियों ने ऐसी गर्भवती महिला (98%) या शिशु (99 प्रतिशत) की देखभाल की है, जिनके स्वास्थ्य पर उनके अनुसार भीषण गर्मी का असर पड़ा था।
चिंता की बात यह है कि लगभग सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने अनुभव में ऐसी स्थिति देखी है। करीब 98% ने ऐसी गर्भवती महिला की देखभाल करने की बात कही, जिसकी सेहत पर उनके मुताबिक अत्यधिक गर्मी का प्रतिकूल असर पड़ा था। वहीं, 99 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने ऐसे बच्चे की देखभाल की, जिसके स्वास्थ्य पर भीषण गर्मी का असर माना गया।
गर्भावस्था में गर्मी क्यों है ज्यादा खतरनाक?
गर्भवती और हाल ही में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाएं अत्यधिक गर्मी के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होती हैं। पहले किए गए रिसर्च में भी गर्मी के संपर्क को समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे के जन्म, मृत बच्चे के जन्म और मां में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं से जोड़ा गया है। 2024 में प्रकाशित महामारी विज्ञान से जुड़े स्टडी की समीक्षा के मुताबिक, गर्मी के संपर्क में हर 1 डिग्री सेल्सियस वृद्धि के साथ समय से पहले प्रसव की संभावना करीब 5 प्रतिशत बढ़ सकती है।
वहीं, हीटवेव के संपर्क को प्रसूति संबंधी जटिलताओं के 25 प्रतिशत अधिक जोखिम से जोड़ा गया है। नए सर्वे में भी स्वास्थ्यकर्मियों ने ऐसे मामले सामने आने की बात कही है। करीब 23 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने ऐसी गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं देखीं, जिनके लिए अतिरिक्त निगरानी या इलाज की जरूरत पड़ी और जिन्हें उन्होंने अत्यधिक गर्मी से जुड़ा माना।
नवजातों पर भी पड़ रहा गर्मी का असर
अत्यधिक गर्मी का असर सिर्फ गर्भवती महिलाओं तक सीमित नहीं है। नवजात शिशुओं में भी स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं सामने आ रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नवजात शिशुओं में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसलिए अत्यधिक गर्मी उनके लिए विशेष चुनौती बन सकती है।
34% स्वास्थ्यकर्मियों ने कम जन्म वजन या बच्चे के विकास में रुकावट के मामले देखे गए।
36% ने नवजातों में डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी बीमारियां पाई गई।
33% ने बच्चों में दूध पीने, सांस लेने और शरीर का तापमान कंट्रोल करने में परेशानी की जानकारी सामने आई।
गर्मी की वजह से इलाज तक पहुंचना भी मुश्किल
भीषण गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर भी पड़ रहा है। सर्वे में करीब 27 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना या वहां जाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, 29 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने तत्काल या इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए आने वाले मामलों में बढ़ोतरी की बात कही।
आने वाले पांच साल को लेकर बड़ी चिंता
सर्वे में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों ने भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है। करीब 81 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अतिरिक्त कदम नहीं उठाए गए तो अगले पांच वर्षों में अत्यधिक गर्मी से मातृ, भ्रूण और नवजात स्वास्थ्य का जोखिम और बढ़ सकता है। वहीं, 82 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को गर्मी से बचाने को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए।
92% स्वास्थ्यकर्मियों ने मांगा ज्यादा प्रशिक्षण
स्वास्थ्यकर्मियों के सामने खुद भी एक बड़ी चुनौती है। सर्वे में 92 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने अत्यधिक गर्मी के दौरान गर्भवती महिलाओं की बेहतर सुरक्षा के लिए ज्यादा प्रशिक्षण और संसाधनों की जरूरत बताई। वहीं, 55 प्रतिशत ने कहा कि अगर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस उपलब्ध हों, तो वे मरीजों को बेहतर देखभाल दे सकेंगे। Wellcome के मुताबिक, भारत और जिम्बाब्वे समेत कुछ देशों में अत्यधिक गर्मी से लोगों को बचाने के लिए व्यावहारिक और कम लागत वाले उपाय पहले से अपनाए जा रहे हैं।
सरकारों से क्लाइमेट प्लान में मांगी गई विशेष व्यवस्था
Wellcome ने सरकारों, स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि राष्ट्रीय जलवायु एवं स्वास्थ्य योजनाओं में गर्भवती महिलाओं, नई माताओं और नवजात बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया जाए। संगठन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से गर्मी, गर्भावस्था और प्रसव के बाद की अवधि को लेकर पहला क्लिनिकल गाइडेंस तैयार करने की भी मांग की है। इसके साथ ही स्वास्थ्य निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों में गर्मी के संपर्क से जुड़े आंकड़ों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
'कई देश बढ़ते तापमान के लिए तैयार नहीं'
Wellcome में Climate Impacts and Adaptation की प्रमुख डॉ. मेडेलीन थॉमसन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही अत्यधिक गर्मी जीवन और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर रही है। लेकिन कई देश इसके लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को बचाने के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली और अपेक्षाकृत ठंडी इमारतों जैसे कई समाधान पहले से मौजूद हैं। चुनौती यह है कि इन उपायों को उन लोगों तक पहुंचाया जाए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इनमें गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु विशेष रूप से शामिल हैं।
यह ऑनलाइन सर्वे 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया। भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, ब्रिटेन और जिम्बाब्वे से 200-200 स्वास्थ्यकर्मियों, यानी कुल 1,000 लोगों को इसमें शामिल किया गया। सर्वे में शामिल विशेषज्ञ गर्भावस्था, प्रसव, प्रसव के बाद की देखभाल और नवजात स्वास्थ्य से सीधे जुड़े हुए थे।