कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए देश में ही नई तकनीक तैयार करने की तैयारी चल रही है। IIT कानपुर और भारत बायोटेक इस दिशा में साथ काम करेंगे। दोनों इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट बीमारी की पहचान, जांच और इलाज से जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करेंगे।
दोनों संस्थानों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इसका मकसद देश में ही नई मेडिकल तकनीक तैयार करना है। आगे इन तकनीकों का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा।
कैंसर और वैक्सीन पर रहेगा खास ध्यान
IIT कानपुर और भारत बायोटेक के बीच हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों पर खास ध्यान दिया गया। साइंटिस्ट इन बीमारियों को समझने पर काम करेंगे। इसके साथ नए इलाज और तकनीक भी तैयार की जाएगी।
बायोमेडिकल और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर IIT कानपुर में पहले से काम हो रहा है। भारत बायोटेक के साथ जुड़ने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
IIT कानपुर पहुंचे भारत बायोटेक के ऑफिसर
IIT कानपुर की इंडस्ट्री कनेक्ट सीरीज के तहत यह मीटिंग हुई। इसमें भारत बायोटेक के प्रेजिडेंट (R&D) डॉ. के. मुरुगप्पन शामिल हुए। IIT कानपुर के शिक्षक और साइंटिस्ट भी मीटिंग में मौजूद रहे। मीटिंग में वैक्सीन, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा हुई।
मीटिंग के बाद डॉ. मुरुगप्पन ने IIT कानपुर की रिसर्च सुविधाएं देखीं। इस दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. जयधरन राव और जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख प्रो. अश्वनी कुमार ठाकुर समेत कई साइंटिस्ट मौजूद रहे।
गंगवाल स्कूल में भी हो रही मेडिकल रिसर्च
IIT कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कई फील्ड पर रिसर्च चल रही है। इनमें हेल्थकेयर में एआई, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक्स शामिल हैं। यहां बीमारी की शुरुआती जांच और मेटाबॉलिक बीमारियों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा इन्फेक्शन, न्यूरोसाइंस, न्यूरोटेक्नोलॉजी और मेंटल हेल्थ पर रिसर्च की जा रही है।
IIT कानपुर और भारत बायोटेक के साथ काम करने से नई वैक्सीन और जांच की बेहतर तकनीक बन सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।
कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट