चीन की बढ़ेगी टेंशन! लद्दाख में 150 KM लंबी नई सड़क बनाने जा रहा है भारत

BRO की श्योक रोड योजना से DBO और डेपसांग तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे सामान पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर होगी और चीन सीमा के पास भारत को एक दूसरा रास्ता मिल सकेगा।

अपडेटेड Oct 02, 2026 पर 8:41 AM
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श्योक नदी के किनारे बनेगी 150 KM लंबी सड़क, DBO और डेपसांग तक पहुंच होगी आसान

पूर्वी लद्दाख में भारत सीमा के पास सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) श्योक नदी के पूर्वी किनारे से दौलत बेग ओल्डी (DBO) तक करीब 150 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इससे DBO और डेपसांग जैसे इलाकों तक पहुंच के लिए एक और रास्ता मिल सकेगा।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 150 किलोमीटर की इस सड़क को पांच हिस्सों में बनाया जाएगा। यह दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड नेटवर्क का हिस्सा होगी। BRO फिलहाल इसकी DPR तैयार कर रहा है। इसमें सड़क के रास्ते, ऊंचाई, मौसम और नदी के बहाव जैसी चीजों की जांच की जाएगी।

DBO तक पहुंच होगी आसान, भारी वाहनों की आवाजाही भी बढ़ेगी


दौलत बेग ओल्डी पूर्वी लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में LAC के पास है। इसके आसपास डेपसांग का इलाका है और यह काराकोरम दर्रे के पास भी है। लेकिन पूर्वी लद्दाख में मौसम इस प्रोजेक्ट की बड़ी चुनौती है। यहां भारी बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन से सड़क प्रभावित हो सकती है। सर्दियों में रास्ते को चालू रखने में मदद मिल सकती है।

श्योक नदी के किनारे सड़क बनाना भी आसान नहीं होगा। नदी का बहाव मौसम के साथ बदलता है और इलाके में काफी ऊंचाई है। इसलिए सड़क के साथ मजबूत सुरक्षा इंतजाम, पुल और खास इंजीनियरिंग की जरूरत होगी।

BRO के कई हिस्सों पर काम जारी

BRO इस पूरे कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सों में 70 फीसदी से ज्यादा काम पूरा होने की जानकारी है।

अगर यह नया रास्ता बनता है, तो DBO और डेपसांग जाने के लिए एक और मार्ग मिल जाएगा। इससे किसी एक रास्ते पर परेशानी होने पर दूसरे रास्ते से रूट जारी रखी जा सकेगी।

क्या फायदे होंगे?

1. दूरी और समय कम: लेह से DBO की दूरी 322

KM से घटकर 243 KM रह जाएगी। 2 दिन का सफर घटकर 11-12 घंटे का रह जाएगा।

2. भारी हथियारों की आवाजाही: इस रूट पर 9

बड़े पुलों को 40 टन से अपग्रेड कर 70 टन क्षमता वाला बनाया जा रहा है, ताकि बोफोर्स तोपें और टैंक आसानी से ले जाए जा सकें।

3. ऑल-वेदर कनेक्टिविटी: 17,660 फीट पर

सासर ला पास के नीचे 7 KM लंबी टनल बनाने की भी योजना है ताकि सर्दियों में भी रास्ता खुला रहे।

BRO (Border Roads Organisation) इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है और बाकी हिर पर 70% से ज्यादा काम पूरा हो गया है।

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