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सिंधु जल संधि पर यूएन सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को गैर कानूनी बताया

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ फिर जहर उगला है। यूएनएससी में पाकिस्तान ने एक पत्र जारी किया, जिसमें सिंधु जल संधि से जुड़े कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के हालिया फैसले के बारे में बताया गया था। विदेश मंत्रालय ने इस हरकत को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना कहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 23, 2026 पर 6:14 PM
सिंधु जल संधि पर यूएन सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को गैर कानूनी बताया
भारत ने पड़ोसी मुल्क की इस हरकत का करारा जवाब दिया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिश एक बार फिर नाकाम हो गई। पाकिस्तान ने यूएनएससी में सिंधु जल समझौते से जुड़े कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के एक हालिया फैसले के बारे में पत्र जारी किया। भारत ने पड़ोसी मुल्क की इस हरकत का करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन गैर-कानूनी तरीके से बना है और सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद झूठ फैला रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान की आदत है कि वह अपने गलत प्रोपेगैंडा के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है। सबसे पहले, यह तथाकथित फैसला परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला नहीं है, जैसा कि पाकिस्तान के मंत्री ने दिखाने की कोशिश की है। बल्कि यह एक गैर-कानूनी तरीके से बने कोर्ट का फैसला है।” उन्होंने आगे कहा, “हम इसे पाकिस्तान की तरफ से असलियत को तोड़-मरोड़कर पेश करने की एक और कोशिश के तौर पर देखते हैं। इस मुद्दे पर हमारी स्थिति बहुत साफ है और हमने इसे कई बार दोहराया है।”

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को नहीं मानता भारत

भारत ने लगातार कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को यह कहते हुए खारिज किया है कि इसे सिंधु जल संधि का उल्लंघन करके बनाया गया था और उसने कभी भी इसे मान्यता नहीं दी या इसकी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। नई दिल्ली ने यह भी कहा है कि ट्रिब्यूनल का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

पिछले साल अप्रैल में, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। नई दिल्ली ने कहा है कि यह संधि तब तक बाधित रहेगी जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद तरीके से और पक्के तौर पर सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना बंद नहीं करता।

सीओए ने 31 अगस्त को जारी किया था फैसला

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 31 अगस्त को एक फैसला दिया, जिसमें कहा गया कि भारत सिंधु जल संधि पर एकतरफा रोक नहीं लगा सकता। भारत ने तुरंत इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि यह “गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया” न्यायाधिकरण है और भारत के संप्रभु फैसले पर इसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था। रणधीर जयसवाल ने ये बातें पाकिस्तान के यूएन सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को 'परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' से जुड़े हालिया फैसलों के बारे में एक पत्र भेजने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहीं।

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