Railway Station Redevelopment: 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर बदले जा रहे 1300 रेलवे स्टेशन, ये है पूरा प्लान

भारतीय रेलवे अगले 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर 1,300 स्टेशनों का पुनर्विकास कर रहा है। 400 स्टेशनों का काम पूरा, ट्रेन संचालन जारी रखते हुए हो रहा विकास।

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 1:32 PM
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भारतीय रेलवे देशभर के करीब 1300 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कर रहा है। इन स्टेशनों को सिर्फ मौजूदा यात्रियों की जरूरतों के हिसाब से नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों की संभावित यात्री संख्या और सुविधाओं की मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। रेलवे की योजना में स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा, यात्री सुविधाओं और स्थानीय वास्तुकला को भी महत्व दिया जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को जयपुर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में 1300 स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम किया जा रहा है। इनमें से करीब 400 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। इस पूरी प्रक्रिया की खास बात यह है कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संचालन बंद किए बिना ही पुनर्विकास का काम किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनों और बड़े स्टेशनों पर की गई व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी। इस साल दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के त्योहारों के दौरान करीब 18000 विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं जबकि पिछले साल इन त्योहारों के लिए लगभग 12000 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था।

अगले 50 साल की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो रहे रेलवे स्टेशन


एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना बनाते समय अगले पांच दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य स्टेशनों की यात्री क्षमता बढ़ाना है ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर भी स्टेशन बेहतर तरीके से काम कर सकें। उन्होंने कहा कि मौजूदा आबादी, यात्रियों की संख्या और आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर स्टेशनों को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। रेलवे के इस पुनर्विकास में स्टेशन की क्षमता बढ़ाने पर खास जोर है। इसका मतलब है कि स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही, भीड़ प्रबंधन और उपलब्ध सुविधाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

जयपुर से केरल तक दिखेगी स्थानीय वास्तुकला की झलक

रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास में सिर्फ आधुनिक सुविधाओं को शामिल करना ही लक्ष्य नहीं है। रेल मंत्री ने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों के स्टेशनों की डिजाइन में वहां की स्थानीय वास्तुकला और सांस्कृतिक पहचान को भी जगह दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर जयपुर के रेलवे स्टेशनों की डिजाइन में जयपुर की विशिष्ट स्थापत्य शैली को शामिल किया जा रहा है। इसी तरह जोधपुर, अहमदाबाद, तमिलनाडु और केरल के स्टेशनों को संबंधित क्षेत्रों की स्थानीय वास्तुकला और परंपराओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य यह है कि रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के साथ-साथ उस क्षेत्र की पहचान को भी प्रदर्शित करें। इस तरह स्टेशन का पुनर्विकास सिर्फ बुनियादी ढांचे में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्थानीय विरासत और आधुनिक डिजाइन का मेल भी देखने को मिलेगा।

1300 स्टेशनों पर काम, करीब 400 का पुनर्विकास पूरा

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देशभर में करीब 1300 रेलवे स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम चल रहा है। इनमें से लगभग 400 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। रेलवे के लिए यह काम इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि भारत में रेल परिवहन आम लोगों की आवाजाही का एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम है। किसी स्टेशन को कई वर्षों के लिए बंद करके उसका पुनर्विकास करना व्यावहारिक नहीं है। रेल मंत्री के मुताबिक कई दूसरे देशों में रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास करने के लिए रेल यातायात को पांच से छह साल तक पूरी तरह रोक दिया जाता है। लेकिन भारत में रेलवे नेटवर्क की अहमियत को देखते हुए स्टेशनों को बंद करना संभव नहीं है।

त्योहारों में 18000 विशेष ट्रेनें चला रहा रेलवे

रेल मंत्री ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए रेलवे की ओर से किए गए इंतजामों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के त्योहारों के दौरान करीब 12000 विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं। इस साल पिछले साल की ट्रेनों के साथ नई विशेष सेवाओं को जोड़कर यह संख्या करीब 18000 हो गई है। त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए रेल यात्रा करते हैं। इस वजह से प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। रेलवे ने इसी दबाव को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं के साथ बड़े स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया है।

नई दिल्ली और उधना स्टेशन पर 20 हजार यात्रियों की क्षमता वाले होल्डिंग एरिया

रेलवे ने अधिक भीड़ वाले स्टेशनों पर यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए बड़े होल्डिंग एरिया बनाए हैं। रेल मंत्री ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, सूरत के उधना स्टेशन और आनंद विहार टर्मिनल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली और उधना रेलवे स्टेशन पर बनाए गए होल्डिंग एरिया में एक समय में करीब 20000 यात्रियों को ठहराया जा सकता है। इन होल्डिंग एरिया में यात्रियों की सुविधा के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। इनमें बेहतर गुणवत्ता वाले शौचालय और हवा के बेहतर आवागमन के लिए एयर सर्कुलेशन सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा टिकट काउंटरों को भी इन होल्डिंग एरिया के अंदर स्थानांतरित किया गया है। इसका मकसद यह है कि यात्रियों को टिकट लेने के लिए भारी भीड़ के बीच से गुजरना न पड़े। वे होल्डिंग एरिया में ही टिकट संबंधी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकें।

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