India-New Zealand FTA: न्यूजीलैंड के साथ भारत का ऐतिहासिक व्यापार समझौता लागू! जानिए सस्ते सेब, कीवी और आपके करियर पर क्या पड़ेगा असर
India-New Zealand FTA :इस करार के तहत,भारत से न्यूजीलैंड को होने वाले सभी निर्यात 100% शुल्क मुक्त होंगे। वहीं,न्यूजीलैंड से भारत को होने वाले 95% निर्यात पर शुल्क में कटौती की जाएगी। इसके अलावा,अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा
India-New Zealand FTA : न्यूजीलैंड की सर्टिफाइड मनुका शहद के लिए, भारत ने 30 डॉलर प्रति किलोग्राम की न्यूनतम आयात कीमत तय की है
India-New Zealand FTA : भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू हो गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे दोनों देशों को फायदा होगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ( Christopher Luxon) ने न्यूजीलैंड-भारत FTA (मुक्त व्यापार समझौता) के लागू होने की घोषणा करते हुए कहा है कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के कारोबारियों के लिए एक अरब से अधिक ग्राहकों के दरवाजे खुलेंगे। टैरिफ (शुल्क) में कमी आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वेतन में बढ़त होगी और न्यूजीलैंड के लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
इस करार के तहत,भारत से न्यूजीलैंड को होने वाले सभी निर्यात 100% शुल्क मुक्त होंगे। वहीं,न्यूजीलैंड से भारत को होने वाले 95% निर्यात पर शुल्क में कटौती की जाएगी। इसके अलावा,अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा और कुशल कामगारों के लिए 5,000 वीजा जारी किए जाएंगे।
बता दें कि भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर से लागू होगा। भारतीय निर्यात पर 100% जीरो-ड्यूटी की सुविधा मिलेगी। इस व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार का विस्तार करना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। इस मौके पर भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले 5 सालों में लागू होने वाला यह सातवां व्यापार समझौता है।
इस समझौते के तहत, न्यूजीलैंड में भारत के 100% निर्यात को बिना किसी शुल्क (zero-duty) के बाजार एंट्री मिलेगी। न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश लाने में मदद करने का भी वादा किया है।
इस समझौते के तहत कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए 'टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीज़ा'की सुविधा भी दी गई है। इसमें 5,000 वीजा का कोटा है और इसके जरिए तीन साल तक न्यूजीलैंड में रहने की अनुमति मिलेगी।
दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 'इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन' (ITPO) न्यूजीलैंड में अपना एक कार्यालय भी खोलेगा।
इस समझौते में भारत ने संवेदनशील सेक्टरों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं। डेयरी उत्पादों, प्याज, बादाम, चीनी और इसी तरह की अन्य कटेगरी पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। न्यूजीलैंड ने 'कृषि उत्पादकता साझेदारी' के माध्यम से भारतीय किसानों को सपोर्ट देने का भी आश्वासन दिया है।
भारत और न्यूजीलैंड ने दिसंबर 2025 में FTA (मुक्त व्यापार समझौता) के लिए बातचीत पूरी कर ली थी और अप्रैल 2026 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते के लागू होने के साथ,चीन को छोड़कर 'रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप' (RCEP) समूह के सभी सदस्यों के साथ भारत के व्यापार समझौते हो जाएंगे। वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूज़ीलैंड के साथ भारत का द्विपक्षीय ट्रेड 1.3 अरब डॉलर रहा था,जो पिछले साल की तुलना में 49% अधिक है।
Today, our India FTA is in effect. Kiwi businesses can now reach over a billion more customers with reduced tariffs, creating more jobs, higher wages and more money flowing into Kiwi communities.
FTA के तहत, भारत न्यूजीलैंड से होने वाले आयात के लिए अपनी 70% टैरिफ लाइनों पर शुल्क में ढील देगा, जिसमें दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार का 95% हिस्सा शामिल होगा।
न्यूजीलैंड के सेबों को 25% आयात शुल्क के साथ भारत में आने की अनुमति होगी, जो एक तय कोटे के अधीन होगा। यह कोटा लागू होने के दूसरे वर्ष में 35,000 मीट्रिक टन होगा,जो छठे वर्ष से बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन हो जाएगा।
1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम से अधिक कीमत वाले कीवी फलों पर कोई शुल्क (जीरो-ड्यूटी) नहीं लगेगा। इसके लिए कोटा दूसरे वर्ष में 8,000 मीट्रिक टन होगा,जो छठे वर्ष से बढ़कर 15,000 मीट्रिक टन हो जाएगा।
न्यूजीलैंड से होने वाले एल्ब्यूमिन के निर्यात पर 11% शुल्क लगेगा। इसके लिए कोटा दूसरे वर्ष में 1,500 मीट्रिक टन होगा, जो पांचवें वर्ष से बढ़कर 3,000 मीट्रिक टन हो जाएगा।
न्यूजीलैंड की सर्टिफाइड मनुका शहद के लिए, भारत ने 30 डॉलर प्रति किलोग्राम की न्यूनतम आयात कीमत तय की है। इसके लिए कोटा पहले वर्ष में 40 मीट्रिक टन होगा जो दूसरे वर्ष से बढ़कर 200 मीट्रिक टन हो जाएगा।
सेब के लिए आयात कोटा की अवधि 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक होगी, जबकि कीवी के लिए यह अवधि 1 अप्रैल से 15 अक्टूबर तक रहेगी। एल्ब्यूमिन और मनुका शहद को पूरे वर्ष आयात किया जा सकेगा।