जबलपुर में बन रही आउटर रिंग रोड में कैसे हो रहा प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल! 3500 करोड़ का ये प्रोजेक्ट दिसंबर 2027 तक होगा कंप्लीट

जबलपुर में 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली आउटर रिंग रोड का निर्माण जारी है। करीब 114 किलोमीटर लंबी यह सड़क दिसंबर 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है। प्रोजेक्ट में फ्लाई ऐश के इस्तेमाल की योजना है।

अपडेटेड Oct 12, 2026 पर 9:10 AM
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जबलपुर: PTI के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर में बन रही आउटर रिंग रोड को लेकर चर्चा तेज है। करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होने और दूसरे शहरों तक आना-जाना आसान होने की उम्मीद है। इस सड़क के निर्माण में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हो रही है। प्रोजेक्ट को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

आउटर रिंग रोड 114 किलोमीटर होने वाली है लंबी

जबलपुर की आउटर रिंग रोड करीब 114 किलोमीटर लंबी होगी। इस पर लगभग 3,540 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, यह चार लेन की सड़क होगी और इसका निर्माण पांच हिस्सों में किया जा रहा है। इस सड़क के बनने से भारी वाहनों को शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे शहर के ट्रैफिक को राहत मिल सकती है। साथ ही, दूसरे शहरों से आने-जाने वाले लोगों और माल ढुलाई करने वाले वाहनों का सफर भी आसान हो सकता है।


सड़क बनाने में प्लास्टिक कचरे का किया जा रहा है इस्तेमाल

सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल नई बात नहीं है। इसके लिए पहले प्लास्टिक को छांटकर साफ किया जाता है और फिर तय प्रक्रिया के मुताबिक उसका इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जाता है।इस तकनीक में प्लास्टिक को सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन के साथ मिलाया जा सकता है। इससे प्लास्टिक कचरे का उपयोग भी होता है और उसे खुले में फेंकने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

दिसंबर 2027 तक पूरी होने वाली है यह सड़क

आउटर रिंग रोड के प्रोजेक्ट में नर्मदा नदी पर करीब 750 मीटर लंबा पुल भी शामिल है। सड़क और पुल का काम पूरा होने के बाद जबलपुर के आसपास के इलाकों से संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।इससे मंडला, डिंडोरी, कटनी और नरसिंहपुर जैसे जिलों से आने-जाने वाले लोगों को भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर सड़क के पूरा होने और ट्रैफिक के इस्तेमाल के बाद ही साफ होगा।

इस प्रोजेक्ट में फ्लाई ऐश का भी इस्तेमाल होने वाला है

इस प्रोजेक्ट में प्लास्टिक कचरे के अलावा फ्लाई ऐश के इस्तेमाल की योजना भी है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, सड़क निर्माण में करीब 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाना है।फ्लाई ऐश बिजली संयंत्रों से निकलने वाला अपशिष्ट है। तय मानकों के मुताबिक इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। इससे औद्योगिक कचरे का उपयोग होता है और उसे निपटाने की जरूरत भी कुछ हद तक कम हो सकती है।

फिलहाल, जबलपुर आउटर रिंग रोड का काम पूरा होने का इंतजार है। दिसंबर 2027 तक इसे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, इसकी सही जानकारी संबंधित विभाग से ही मिल पाएगी।

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