जयपुर के अभिनव ने बनाया 22 भाषाओं में बात करने वाला स्मार्ट ग्लव्स! साइन लैंग्वेज को आवाज और टेक्स्ट में बदल देगा

जयपुर के अभिनव शेखर वशिष्ठ ने बधिर लोगों के लिए VOIS स्मार्ट ग्लव्स बनाया है। यह 22 भाषाओं से जुड़ा है और साइन लैंग्वेज के जरिए बातचीत आसान करता है। इसमें आवाज को टेक्स्ट में बदलने और जरूरी आवाजों का अलर्ट देने जैसे फीचर हैं। अब टीम साइन लैंग्वेज को टेक्स्ट और आवाज में बदलने की तकनीक पर काम कर रही है।

अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 1:25 PM
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जयपुर के अभिनव शेखर का यह खास स्मार्ट ग्लव्स मूक बधिर लोगों के जीवन को बनाएगा आसान, 22 भाषाओं को ट्रांसलेट करने वाला स्मार्ट ग्लव्स

जयपुर। बधिर लोगों के लिए अभिनव शेखर वशिष्ठ ने VOIS स्मार्ट ग्लव्स तैयार किया है। यह डिवाइस साइन लैंग्वेज से बातचीत को आसान बनाने में मदद करता है और 22 भाषाओं से जुड़ा है।

इस डिवाइस का आइडिया अभिनव को स्कूल के दिनों में आया था। उन्होंने कुछ बच्चों को हाथों और इशारों से बात करते देखा तो उनके मन में इसे आसान बनाने का ख्याल आया। इसके बाद 2016 में उन्होंने इस पर काम शुरू किया और करीब चार साल की मेहनत के बाद स्मार्ट ग्लव्स तैयार किया।

इस तरह बदला VOIS का डिजाइन


शुरुआत में ग्लव्स की उंगलियों पर अलग-अलग टच पॉइंट लगाए गए थे। इन्हें छूने पर शब्द या पूरा वाक्य तैयार हो जाता था और सामने वाला उसे समझ सकता था। लेकिन बधिर लोगों के बीच इस्तेमाल करने पर अभिनव को पता चला कि कई लोगों के लिए हिंदी या अंग्रेजी में लिखी बात समझना भी आसान नहीं है। इसके बाद उन्होंने ग्लव्स को साइन लैंग्वेज से जोड़ने पर काम शुरू किया।

अभिनव और उनकी टीम ने ऐसा सिस्टम बनाया है, जो लिखी बात या आवाज को साइन लैंग्वेज में बदल देता है। यह 22 भाषाओं में काम करता है और वेबसाइट पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बधिर व्यक्ति किसी लाइन पर क्लिक करेगा तो उसकी जानकारी साइन लैंग्वेज में दिखाई देगी। इससे उन्हें बात समझने में आसानी होगी।

तीन तरह से मदद करता है डिवाइस

VOIS को बधिर लोगों की रोज की बातचीत और जरूरी आवाजों को समझने में मदद के हिसाब से तैयार किया गया है। इसमें कई फीचर दिए गए हैं।

• सेंटेंस मोड: टच पॉइंट के जरिए आम शब्दों और वाक्यों को तैयार करने में मदद मिलती है।

• लिसनिंग फीचर: सामने वाले की आवाज को टेक्स्ट में बदलकर स्मार्ट रिस्टबैंड की स्क्रीन पर दिखाया जा सकता है।

• अलर्ट सिस्टम: अलार्म, बच्चे के रोने या दरवाजे की घंटी जैसी जरूरी आवाजों की जानकारी बधिर यूजर को दी जा सकती है।

अभिनव की टीम अब इस तकनीक को और आगे ले जाने पर काम कर रही है। फिलहाल ऐसी तकनीक की टेस्टिंग की जा रही है जिसमें मोबाइल कैमरे के सामने कोई व्यक्ति साइन लैंग्वेज में बात करेगा तो उसे टेक्स्ट में बदला जा सकेगा और आगे आवाज में भी सुनाया जा सकेगा। इससे भविष्य में बधिर और सुन सकने वाले व्यक्ति के बीच मोबाइल के जरिए बातचीत आसान हो सकती है।

डिवाइस की कीमत और जरूरत

अभिनव की कंपनी सोनैंट टेक्नोलॉजीज ने VOIS को इस तरह तैयार किया है कि इसका इस्तेमाल अलग-अलग उम्र के बधिर लोग कर सकें। इसके लिए बेसिक भाषा की समझ जरूरी है। इस डिवाइस की कीमत करीब 15 से 20 हजार रुपये बताई गई है।

अभिनव के मुताबिक, बधिर और कम सुनने वाले लोगों को शिक्षा, रोजगार और रोज की बातचीत में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। VOIS जैसे डिवाइस का मकसद सिर्फ बातचीत को आसान बनाना नहीं, बल्कि जरूरी जानकारी और सुविधाओं तक उनकी पहुंच को भी बेहतर करना है।

जयपुर से अंकित राजपूत की रिपोर्ट

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