लेदर थ्रेड से मिलेट्स बिस्किट तक... 20 देशों में पहुंचे कानपुर की महिला कारोबारियों के उत्पाद, खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस!
Kanpur Women Entrepreneurs: औद्योगिक शहर कानपुर में अब रसोई नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां संभाल रही हैं महिलाएं। पिछले 5 वर्षों में महिला उद्यमियों की संख्या 20% बढ़ी है। लेदर थ्रेड से लेकर मिलेट्स बिस्किट बनाने वाली प्रेरणा वर्मा और संगीता सिंह जैसी महिलाओं ने करोड़ों का कारोबार खड़ा कर 20 से अधिक देशों में उत्पाद एक्सपोर्ट किए हैं। कानपुर में 41,000 से ज्यादा महिला MSME रजिस्ट्रेशन से ₹919 करोड़ का निवेश आया है और 2.2 लाख लोगों को रोजगार मिला है। पढ़िए आधी आबादी के इस शानदार सफर की पूरी कहानी
कानपुर में पुरुषों के वर्चस्व वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महिलाओं का दबदबा तेजी से बढ़ा है
Kanpur Women Entrepreneurs Success Story: जब भी हमारे जुबान पर इंडस्ट्री का नाम आता है तो इसको हम पुरुष प्रधान क्षेत्र समझते हैं वही कानपुर को लंबे समय से देश के बड़े औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। यहां कारखानों और कारोबार की बात होती थी तो ज्यादातर पुरुष कारोबारी ही सामने आते थे। अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। शहर की महिलाएं भी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
जिन महिलाओं को पहले हम घर संभालते हुए देखे थे अब वह बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और इंडस्ट्रीज या संभाल रही है ,बीते पांच साल में कानपुर में महिला कारोबारियों और उद्यमियों की संख्या में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि महिलाएं अब सिर्फ छोटे कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद औद्योगिक इकाइयां चला रही हैं और दूसरे लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।
लेदर, कपड़ा, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। कई महिला उद्यमियों के उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों में पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ का माल विदेशों तक भी सप्लाई हो रहा है। यानी कानपुर की आधी आबादी अब कारोबार में सिर्फ हिस्सेदारी नहीं बढ़ा रही, बल्कि खुद कारोबार की कमान संभाल रही है।
केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार
फजलगंज इंडस्ट्रियल एरिया में लेदर उद्योग से जुड़ी प्रेरणा वर्मा की कहानी इसकी बड़ी मिसाल है। प्रेरणा पहले एक प्राइवेट नौकरी करती थीं। नौकरी में मन नहीं लगा तो खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने लेदर उत्पादों की ट्रेडिंग की। कारोबार बढ़ा तो अपनी फैक्ट्री लगाने का सपना देखा और उसे भी पूरा कर लिया।
आज उनकी फैक्ट्री में लेदर थ्रेड, बैग और कस्टमाइज लेदर आइटम तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। उनके उत्पाद करीब 20 देशों तक पहुंच रहे हैं। फैक्ट्री में 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।
केस 2: मोटे अनाज से बनाए बिस्किट और नमकीन, विदेश तक पहुंचा कारोबार
बर्रा-2 निवासी संगीता सिंह ने वर्ष 2023 में अपना कारोबार शुरू किया। उन्होंने मोटे अनाज से अलग तरह के बिस्किट और नमकीन तैयार किए। शुरुआत में कारोबार छोटा था, लेकिन लोगों को उत्पाद पसंद आए तो धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। पहले उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचे और इसके बाद विदेशों में भी इनकी मांग बनने लगी।
आज संगीता का कारोबार करोड़ों रुपये सालाना तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि सही उत्पाद और मेहनत के दम पर महिलाएं भी बड़े कारोबार खड़े कर सकती हैं।
उद्योग से रोजगार तक, महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी
कानपुर में महिला उद्यमिता का बढ़ता दायरा सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। इन उद्योगों के जरिए महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। कई महिला कारोबारी अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी काम से जोड़ रही हैं। इससे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खुल रहा है।
कभी जिन महिलाओं को उद्योग की दुनिया से दूर माना जाता था, वही अब मशीनों के बीच खड़े होकर प्रोडक्शन की कमान संभाल रही हैं। लेदर से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं कारोबार को नई दिशा दे रही हैं। इनके उत्पाद अब कानपुर और देश के बाजार से निकलकर विदेशों तक पहुंच रहे हैं।
महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए IIA में बनी महिला विंग
कानपुर में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA में महिला विंग भी बनाई गई है। इसका मकसद शहर की महिला उद्यमियों को एक मंच देना, उन्हें उद्योग से जुड़ी जानकारी और नए अवसरों से जोड़ना और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करना है। महिला उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग बढ़ाने के साथ उन्हें बाजार, तकनीक और कारोबार से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कानपुर की औद्योगिक तस्वीर में अब आधी आबादी की यह बढ़ती हिस्सेदारी साफ दिखाई दे रही है। महिलाएं खुद उद्योग चला रही हैं, लोगों को रोजगार दे रही हैं और अपने उत्पादों को देश ही नहीं, विदेशों के बाजार तक पहुंचा रही हैं। ऐसे में शहर की इंडस्ट्रियल पहचान में महिलाओं की यह बढ़ती भूमिका आने वाले समय में और बड़ी दिखाई दे सकती है।
पिछले पांच सालों में महिला उद्यमियों से जुड़े ये है प्रमुख आंकड़े