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Karwa Chauth 2026: खुशहाल दांपत्य के लिए कब किया जाएगा करवाचौथ का व्रत? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल दांपत्य के लिए इस व्रत को करती हैं। आइए जानें इस साल करवा चौथ का व्रत किस तारीख को किया जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 29, 2026 पर 8:54 PM
Karwa Chauth 2026: खुशहाल दांपत्य के लिए कब किया जाएगा करवाचौथ का व्रत? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि
हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है।

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं का बेहद महत्वपूर्ण उपवास माना जाता है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल दांपत्य के लिए करती हैं। इस व्रत में विवाहित मिहलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं, रात को चंद्र दर्शन, पूर्जा और अर्घ्य देने के बाद अपने उपवास का पारण करती हैं। हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश भगवान की पूजा और कथा सुनी जाती है। आइए जानें इस साल अखंड सौभाग्य का यह व्रत किस तारीख को किया जाएगा?

करवा चौथ 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1 बजकर 7 मिनट से आरंभ होगी और 29 अक्तूबर की रात 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा।

परिधि योग में होगा करवा चौथ का व्रत

इस साल अखंड सौभाग्य के व्रत करवा चौथ पर परिधि योग का निर्माण होगा। साथ ही, चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे और गौरी योग का भी संयोग बनेगा।

करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक परंपराओं में करवा चौथ को दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य से जुड़ा व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती की आराधना करने से सुहाग की रक्षा और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर करवा माता के साथ भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर अविवाहित कन्याओं द्वारा मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखने की परंपरा है।

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