Delhi-Amritsar-Katra Expressway: देश की राजधानी दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का नया रास्ता तैयार हो रहा है। चार लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से सफर का समय करीब आधा करने का लक्ष्य है। यह कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कारोबार, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई को भी नई रफ्तार देगा। इसी कड़ी में दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स साबित होने वाला है। करीब 680 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का मकसद दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से तेज सड़क कनेक्टिविटी देना है।
न्यूज 18 के मुताबिक, प्रोजेक्ट की शुरुआती आधिकारिक जानकारी में इसकी लंबाई 669 किलोमीटर और लागत करीब ₹37,524 करोड़ बताई गई थी। जबकि NHAI के बाद के दस्तावेजों में इसकी लंबाई करीब 680 किलोमीटर बताई जा रही है। 2022 के NHAI दस्तावेज में लागत करीब ₹39,500 करोड़ बताई गई थी। इसलिए अलग-अलग स्रोतों में आंकड़ों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।
दिल्ली से कटरा का सफर 14 घंटे से घटकर करीब 6 घंटे
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका संभावित ट्रैवल टाइम सेविंग है। NHAI के प्रोजेक्ट लक्ष्य के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार और संबंधित कनेक्टिविटी चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा करीब 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह सकती है। इसी तरह दिल्ली से अमृतसर जाने में लगने वाला समय करीब 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे होने का लक्ष्य है। यानी लंबी दूरी की सड़क यात्रा में समय की बड़ी बचत हो सकती है।
हालांकि, ये आंकड़े प्रोजेक्ट के पूरे कॉरिडोर के चालू होने पर अनुमानित यात्रा समय हैं। अभी पूरे दिल्ली-कटरा कॉरिडोर पर लगातार बिना रुकावट यात्रा संभव नहीं है, क्योंकि कुछ हिस्सों पर निर्माण और पैकेज स्तर का काम जारी है।
चार राज्यों/क्षेत्रों को जोड़ेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का रूट दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक जाता है। यह कई महत्वपूर्ण शहरों और आर्थिक केंद्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकारी प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंट्स में दिल्ली, रोहतक, सोनीपत, संगरूर, पटियाला, जालंधर, लुधियाना, मोहाली, कपूरथला और जम्मू जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी का उल्लेख है। इसके अलावा यह कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने में मदद करेगा।
NH-44 पर ट्रैफिक का दबाव होगा कम
दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जाने वाले यातायात का बड़ा हिस्सा मौजूदा नेशनल हाईवे नेटवर्क पर निर्भर करता है। नया एक्सप्रेसवे लंबी दूरी के ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक हाई-स्पीड कॉरिडोर उपलब्ध कराएगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड डिजाइन का मतलब है कि रास्ते में अवैध एंट्री और एग्जिट को सीमित किया जाएगा। इससे लंबी दूरी के वाहनों की गति और ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगी बड़ी रफ्तार
सिर्फ यात्रियों को नहीं, कारोबार को भी होगा फायदा
जुलाई 2026 में कई हिस्सों का उद्घाटन
एक्सप्रेसवे में हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम
गांवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा