Delhi-Amritsar-Katra Expressway: दिल्ली से कटरा सिर्फ 6 घंटे और अमृतसर 4 घंटे में! 680 KM का ये एक्सप्रेसवे बदल देगा सफर का अंदाज, ₹39,000 करोड़ से बन रहा मेगा कॉरिडोर

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: नया कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली से कटरा तक का सफर करीब 14 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे में पूरा हो जाएगा। वहीं, दिल्ली-अमृतसर यात्रा का समय भी करीब 8 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे हो जाएगा। इससे लाखों यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे आने वाले वर्षों में दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच तेज सड़क कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन और माल ढुलाई के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बन सकता है

अपडेटेड Sep 27, 2026 पर 2:05 PM
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Delhi-Amritsar-Katra Expressway: दिल्‍ली से कटरा 14 के बजाय अब 6 घंटे और अमृतसर सिर्फ 4 घंटे लगेंगे

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: देश की राजधानी दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का नया रास्ता तैयार हो रहा है। चार लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से सफर का समय करीब आधा करने का लक्ष्य है। यह कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कारोबार, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई को भी नई रफ्तार देगा। इसी कड़ी में दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स साबित होने वाला है। करीब 680 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का मकसद दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से तेज सड़क कनेक्टिविटी देना है।

न्यूज 18 के मुताबिक, प्रोजेक्ट की शुरुआती आधिकारिक जानकारी में इसकी लंबाई 669 किलोमीटर और लागत करीब ₹37,524 करोड़ बताई गई थी। जबकि NHAI के बाद के दस्तावेजों में इसकी लंबाई करीब 680 किलोमीटर बताई जा रही है। 2022 के NHAI दस्तावेज में लागत करीब ₹39,500 करोड़ बताई गई थी। इसलिए अलग-अलग स्रोतों में आंकड़ों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।

दिल्ली से कटरा का सफर 14 घंटे से घटकर करीब 6 घंटे


इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका संभावित ट्रैवल टाइम सेविंग है। NHAI के प्रोजेक्ट लक्ष्य के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार और संबंधित कनेक्टिविटी चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा करीब 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह सकती है। इसी तरह दिल्ली से अमृतसर जाने में लगने वाला समय करीब 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे होने का लक्ष्य है। यानी लंबी दूरी की सड़क यात्रा में समय की बड़ी बचत हो सकती है।

हालांकि, ये आंकड़े प्रोजेक्ट के पूरे कॉरिडोर के चालू होने पर अनुमानित यात्रा समय हैं। अभी पूरे दिल्ली-कटरा कॉरिडोर पर लगातार बिना रुकावट यात्रा संभव नहीं है, क्योंकि कुछ हिस्सों पर निर्माण और पैकेज स्तर का काम जारी है।

चार राज्यों/क्षेत्रों को जोड़ेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर

दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का रूट दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक जाता है। यह कई महत्वपूर्ण शहरों और आर्थिक केंद्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकारी प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंट्स में दिल्ली, रोहतक, सोनीपत, संगरूर, पटियाला, जालंधर, लुधियाना, मोहाली, कपूरथला और जम्मू जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी का उल्लेख है। इसके अलावा यह कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने में मदद करेगा।

NH-44 पर ट्रैफिक का दबाव होगा कम

दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जाने वाले यातायात का बड़ा हिस्सा मौजूदा नेशनल हाईवे नेटवर्क पर निर्भर करता है। नया एक्सप्रेसवे लंबी दूरी के ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक हाई-स्पीड कॉरिडोर उपलब्ध कराएगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड डिजाइन का मतलब है कि रास्ते में अवैध एंट्री और एग्जिट को सीमित किया जाएगा। इससे लंबी दूरी के वाहनों की गति और ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।

धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगी बड़ी रफ्तार

  • इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ सड़क परियोजना नहीं, बल्कि 'कॉमर्स और आस्था' को जोड़ने वाला कॉरिडोर भी माना जा रहा है। एक तरफ दिल्ली है, जहां बड़ी संख्या में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। दूसरी तरफ पंजाब का अमृतसर, जहां स्वर्ण मंदिर देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है। इसके आगे कटरा, जो माता वैष्णो देवी यात्रा का प्रमुख बेस कैंप है।
  • NHAI ने भी इस एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजना के तौर पर रेखांकित किया है। इसके जरिए वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर और पंजाब-जम्मू-कश्मीर के अन्य धार्मिक स्थलों तक सड़क पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

सिर्फ यात्रियों को नहीं, कारोबार को भी होगा फायदा

  • इस कॉरिडोर का असर पर्यटन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर कृषि, उद्योग और व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
  • तेज सड़क कनेक्टिविटी से फल, सब्जियां, कृषि उत्पाद, कपड़ा, ऊनी उत्पाद और अन्य सामान तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचाए जा सकते हैं। इससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा यात्रा समय में कमी आने की संभावना है।
  • सरकारी परियोजना दस्तावेजों में सोनीपत, रोहतक, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, अमृतसर और जम्मू समेत कई आर्थिक केंद्रों तथा फूड, टेक्सटाइल और अन्य क्लस्टर्स से कनेक्टिविटी को परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया गया है।

जुलाई 2026 में कई हिस्सों का उद्घाटन

  • इस परियोजना की दिशा में एक बड़ा कदम 17 जुलाई 2026 को हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के हरियाणा और पंजाब के कुछ तैयार हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित किया।
  • DD India की रिपोर्ट के अनुसार, उस अवसर पर हरियाणा में एक्सप्रेसवे के 157.92 किलोमीटर के पैकेज 1 से 5 को करीब ₹9,680 करोड़ की लागत से तैयार किए जाने के बाद समर्पित किया गया। इसके अलावा पंजाब में करीब 30.9 किलोमीटर के पैकेज-6 का भी उद्घाटन किया गया।
  • 2026 में कई पैकेजों के पूरा होने के बावजूद पूरा कॉरिडोर अभी एक साथ चालू नहीं हुआ है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है। जम्मू-कश्मीर के करीब 143 किलोमीटर हिस्से को अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

एक्सप्रेसवे में हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम

  • प्रोजेक्ट में आधुनिक सड़क सुरक्षा व्यवस्था और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS/ATMS) जैसी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का लक्ष्य है। ऐसे सिस्टम में ट्रैफिक मॉनिटरिंग, कैमरा आधारित निगरानी, वाहन पहचान और दुर्घटना/घटना पर तेजी से प्रतिक्रिया जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बताई है।

गांवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा

  • एक्सप्रेसवे का फायदा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
  • बेहतर कनेक्टिविटी से वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स, होटल, ढाबे, परिवहन, स्थानीय बाजार और पर्यटन सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
  • धार्मिक पर्यटन बढ़ने पर अमृतसर, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

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