PTI की रिपोर्ट की मुताबिक, केदारनाथ धाम में इस बार भक्तों के साथ कचरे का भी रिकॉर्ड टूट गया है। RTI से मिले आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक, सिर्फ 5 महीनों में केदारनाथ में 50.30 मीट्रिक टन कचरा निकला है। ये आंकड़ा पिछले पूरे साल के कचरे से ढाई गुना ज्यादा है।
नोएडा के RTI एक्टिविस्ट अमित गुप्ता के सवाल पर नगर पंचायत केदारनाथ ने ये डेटा जारी किया है।
पिछले 3 सालों का रिकॉर्ड ध्वस्त
2026 के सिर्फ 5 महीने का कचरा, पिछले तीनों सालों के पूरे यात्रा सीजन से ज्यादा है।
- 2026 (अप्रैल-अगस्त): 50.30 टन
यानी इस साल 2025 के मुकाबले 135% ज्यादा कचरा निकल चुका है। महीने के हिसाब से देखें तो अप्रैल में 1.7 टन, मई में कपाट खुलते ही 16.3 टन, जून में 11.5 टन, जुलाई में 10.5 टन और अगस्त में 10.3 टन कचरा जमा हुआ।
20 टन सिर्फ प्लास्टिक, लैंडफिल पर दबाव
इसमें सबसे खतरनाक है प्लास्टिक। कुल कचरे में से करीब 20 टन सिर्फ प्लास्टिक वेस्ट है। इसमें से 18.5 टन को प्रोसेस कर दिया गया है, लेकिन 1.5 टन अभी भी बाकी है।
नगर पंचायत के मुताबिक केदारनाथ में 30,000 स्क्वायर फीट का लैंडफिल है, जिसमें अब सिर्फ 28,000 स्क्वायर फीट जगह बची है। पिछले 5 साल में यहां 4 लैंडफिल बनाए जा चुके हैं।
15 लाख यात्री और पर्यावरण पर संकट
इस साल अब तक करीब 15 लाख तीर्थयात्री केदारनाथ आ चुके हैं। बढ़ती भीड़ के साथ वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
"सिर्फ 5 महीने में इतना कचरा हिमालय जैसे नाजुक इकोसिस्टम के लिए गंभीर खतरा है। हम खुद ही इस पवित्र धाम को डंपिंग ग्राउंड बना रहे हैं।"
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कचरे पर लगाम नहीं लगी, तो आने वाले सालों में केदारनाथ के ग्लेशियर और जल स्रोतों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।