Get App

Ladakh Saffron Farming: दुनिया का सबसे महंगा मसाला अब लद्दाख में! बंजर जमीन पर 30 दिन में उगा सोना!

लद्दाख के लेह में बंजर जमीन पर 30 दिन में केसर के फूल खिल उठे। स्पितुक फारका में 4000 वर्ग मीटर जमीन पर ईरान से लाए 90,000 बल्ब लगाए गए थे, जिससे 4 दिन में 22 ग्राम केसर मिला। हिम सरोवर प्रोजेक्ट के तहत हुई इस सफलता से लद्दाख में केसर की व्यावसायिक खेती की नई उम्मीद जगी है।

Roopali Sharma
अपडेटेड Nov 03, 2026 पर 08:41
Ladakh Saffron Farming: दुनिया का सबसे महंगा मसाला अब लद्दाख में! बंजर जमीन पर 30 दिन में उगा सोना!

लद्दाख में पहले बंजर पड़ी जमीन पर अब केसर के फूल खिलने लगे हैं। प्रशासन को उम्मीद थी कि फूल आने में करीब दो महीने लगेंगे, लेकिन महज 30 दिनों में फूल खिलने शुरू हो गए। चार दिनों में करीब 22 ग्राम केसर भी इकट्ठा किया गया है।

लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने लेह के स्पितुक फारका में करीब 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर केसर की खेती की शुरुआत की। एक अक्टूबर को यहां ईरान से मंगाए गए करीब 90,000 केसर के बल्ब लगाए गए थे, जिनका कुल वजन 800 किलोग्राम था।
आमतौर पर यहां रोजाना 20 से 25 फूल खिलते हैं, लेकिन रविवार सुबह 72 फूल खिले। यह अब तक एक दिन में खिले फूलों की सबसे अधिक संख्या है।

जिस जमीन पर अब केसर उगाया जा रहा है, वह पहले बंजर थी और खेती के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी। इसे हिम सरोवर परियोजना के तहत सुधारा गया। इस परियोजना का उद्देश्य बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी को बचाना और लद्दाख में जल आपूर्ति को बेहतर बनाना है।
उपराज्यपाल के मुताबिक, यह सफलता बड़े पैमाने पर केसर उत्पादन की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है। इससे स्थानीय लोगों के लिए खेती और कृषि आधारित व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे।

केसर दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के पंपोर क्षेत्र में होती है। लद्दाख प्रशासन के अनुसार, देश के कुल केसर उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत है।

केसर की खेती आसान नहीं है। इसके प्रत्येक फूल से केवल तीन लाल धागे निकलते हैं, जिन्हें स्टिग्मा कहा जाता है। इन्हें हाथ से सावधानीपूर्वक निकालकर सुखाया और संसाधित किया जाता है।
मार्च 2025 में प्रशासन ने बताया था कि CSIR-भारतीय समेकित चिकित्सा संस्थान के वैज्ञानिक दो साल से लद्दाख में केसर की खेती का परीक्षण कर रहे थे। अब इस परियोजना की सफलता से क्षेत्र में केसर उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें