एक ही साल में शामिल होंगे 18 नए युद्धपोत! ये होगा भारतीय नौसेना बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार, जानिए 5 बड़ी बातें

भारतीय वायुसेना में इस साल 18 युद्धपोतों को शामिल किया जाएगा। इसे नौसेना के इतिहास में एक साल में किया गया सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस योजना की औपचारिक घोषणा की। आइए जानें नौसेना के इस विस्तार की 5 बड़ी बातें

अपडेटेड Sep 30, 2026 पर 10:49 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
भारतीय नौसेना 2035 तक 200 से ज्यादा जहाजों का बेड़ा बनाने की दिशा में काम कर रही है।

भारतीय नौसेना इस साल अपने बेड़े में 18 नए युद्धपोत शामिल करने की योजना बना रही है। इसे नौसेना के इतिहास में एक साल में किया गया सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है। इन जहाजों में फ्रंटलाइन कॉम्बैट प्लेटफॉर्म और खास सपोर्ट जहाज होंगे, जो सभी भारतीय शिपयार्ड में बनाए जाएंगे। प्लान किए गए जहाजों में आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट शामिल हैं जो सतह पर युद्ध, एयर डिफेंस और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन सहित कई तरह के मिशन के लिए तैयार हैं। नौसेना का यह कदम घरेलू युद्धपोत निर्माण को मजबूत करने के सरकार के प्रयास को दिखाता है।

रक्षा उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भरता है फोकस

भारतीय नौसेना 2035 तक 200 से ज्यादा जहाजों का बेड़ा बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसका फोकस रक्षा उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करना है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय नौसेना इस साल 18 युद्धपोतों को शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस प्लान को नौसेना के इतिहास में एक साल में सबसे बड़ा विस्तार बताया।


हाल में कमीशन युद्धपोतों में 75% से ज्यादा स्वदेशी चीजें 

नौसेना के साल में दो बार होने वाले कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 में बोलते हुए, सिंह ने कहा कि भारत का स्वदेशी युद्धपोत बनाने का इकोसिस्टम तेजी से वैश्विक मानक को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75% से ज्यादा स्वदेशी चीजें थीं। उन्होंने भारत से घरेलू जरूरतों को पूरा करने के अलावा, दूसरे देशों को युद्धपोत निर्यात करने के लिए भी कहा।

हिंद महासागर क्षेत्र में फर्स्ट रिस्पॉन्डर बना भारत 

नौसेना के बढ़ते ऑपरेशनल फुटप्रिंट पर जोर देते हुए, सिंह ने कहा कि दक्षिण चीन सागर, मेडिटेरेनियन और अटलांटिक महासागर जैसे इलाकों में भारतीय युद्धपोतों की तैनाती, नौसेना की बढ़ती क्षमताओं को दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में एक फर्स्ट रिस्पॉन्डर और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के तौर पर स्थापित किया है। नौसेना ने क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा करने, देश की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने और अपनी समुद्री पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। सिंह ने कहा कि निगरानी तंत्र को समुद्री यातायात की बढ़ती मात्रा और मुश्किलों के साथ तालमेल बिठाना होगा। उन्होंने देश के समुद्री मॉनिटरिंग आर्किटेक्चर को अपग्रेड करने और मजबूत एनालिटिकल क्षमताओं की मांग की।

विकसित भारत 2047 के विजन के केंद्र में है नौसेना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान नौसेना के आधुनिकीकरण पर सरकार के फोकस पर जोर देते हुए, सिंह ने कहा कि नौसेना विकसित भारत 2047 के विजन के लिए केंद्र में है। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारिया समुद्री सीमाओं की रक्षा करने से कहीं अधिक आर्थिक हितों को सुरक्षित करने, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और भारत के स्ट्रेटेजिक पावर प्रोजेक्शन का समर्थन करने तक फैली हुई हैं। सिंह ने पश्चिम एशिया संकट पर नौसेना की प्रतिक्रिया की भी तारीफ की। खासकर ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत होर्मुज स्ट्रेट से LPG कैरियर समेत भारतीय झंडे वाले मर्चेंट वेसल के सुरक्षित रास्ते को सुनिश्चित करने की कोशिशों की सराहना की।

आर्थिक स्थिरता के लिए समुद्री सुरक्षा जरूरी

भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए समुद्री सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि देश अपने कच्चे तेल का लगभग 85-90% और अपनी नैचुरल गैस का लगभग 50% समुद्री रास्तों से आयात करना है। उन्होंने कहा कि इसलिए, जरूरी समुद्री रास्तों की सुरक्षा सीधे देश की ऊजा सुरक्षा, आर्थिक हितों और रक्षा तैयारियों से जुड़ी है।

चीन को चटाई धूल, वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी! भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने की पूरी कहानी

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।