भारत को मिल गई पहली LNG ट्रेन, जानिए ये हाइड्रोजन ट्रेन से कितनी अलग है और दोनों में क्या है खास

भारत में रेल सफर के लिए LNG और हाइड्रोजन से चलने वाली नई ट्रेनों पर काम हो रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जबकि LNG ट्रेन में LNG और डीजल दोनों का इस्तेमाल होता है।

अपडेटेड Sep 28, 2026 पर 3:26 PM
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भारतीय रेलवे अब डीजल के साथ LNG और हाइड्रोजन जैसी तकनीकों को भी आजमा रहा है, ताकि ट्रेन ऑपरेशन में फ्यूल की बचत करके और पॉल्यूशन को कम किया जा सके।

भारतीय रेलवे अब डीजल के अलावा दूसरे फ्यूल से ट्रेन चलाने का प्रयास कर रहा है। देश की पहली LNG ट्रेन 27 सितंबर को गुजरात के साबरमती से शुरू की गई। इससे पहले 17 जुलाई को भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हो चुकी है। दोनों ट्रेनों को डीजल की मांग कम करने के लिए बनाया गया है, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है।

साबरमती से चली पहली LNG ट्रेन

देश की पहली LNG ट्रेन ने 27 सितंबर को साबरमती से मेहसाणा तक अपनी पहली जर्नी की। आठ नॉन-एसी चेयर कार कोच वाली इस ट्रेन का सफर 62 किलोमीटर का था। इसमें दो पावर कार लगाई गई हैं, जिनकी कैपेसिटी 1,400-1,400 हॉर्सपावर है। यह ट्रेन पूरी तरह LNG पर नहीं चलती। LNG से चलाने के साथ इसमें जरूरत पड़ने पर डीजल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।


LNG से कैसे कम होगी डीजल की जरूरत?

LNG (Liquefied Natural Gas) को डीजल के साथ इस्तेमाल किया जाता है। मौजूदा सिस्टम में इससे डीजल की खपत 40 फीसदी तक कम हो सकती है। इससे रेलवे के ईंधन खर्च में भी कमी आ सकती है। एक बदली हुई पावर कार से हर साल करीब 11.9 लाख रुपये की बचत हो सकती है। वहीं आठ कोच वाली पूरी ट्रेन से सालाना 23.9 लाख रुपये लगभग बच सकते है। LNG से चलने वाली इस ट्रेन से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और दूसरे प्रदूषक कम हो सकते है।

ऐसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन का सिस्टम LNG ट्रेन से काफी अलग है। इसमें हाइड्रोजन को जलाकर इंजन नहीं चलाया जाता। ट्रेन में रखी हाइड्रोजन को फ्यूल सेल में भेजा जाता है। वहां हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रोसेस करने से बिजली बनती है। इसी बिजली से ट्रेन चलती है और हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन से टेलपाइप पर कार्बन नहीं निकलता है।

हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने के लिए जींद में अलग व्यवस्था बनाई गई है। इस सिस्टम में करीब 3,000 किलो हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है।

इस रूट से चलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अभी हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चल रही है। यह करीब 89 किलोमीटर का सेक्शन है। ट्रेन में दो हाइड्रोजन पावर कार और आठ पैसेंजर कोच हैं। दोनों पावर कार मिलकर 2,400 किलोवाट की पावर देती हैं। ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के लिए बनाया गया है। अभी यह करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल रही है। इसमें करीब 2,600 पैसेंजर के सफर करने की कैपेसिटी है और एक बार टैंक भरने पर यह करीब 250 से 300 किलोमीटर चल सकती है।

हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए रेलवे ने की ये तैयारी

भारतीय रेलवे की 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' स्किम के में हेरिटेज और पहाड़ी रूट पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनसेट चलाने का प्लान है। इनमें ये रूट शामिल हैं:

  • नीलगिरी माउंटेन रेलवे
  • दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
  • कालका-शिमला रेलवे
  • कांगड़ा वैली रेलवे
  • माथेरान हिल रेलवे
  • बिलमोरा-वाघई
  • पातालपानी-कालाकुंड
  • मारवाड़-गोरम घाट

LNG और हाइड्रोजन से ट्रेन चलाने की कोशिश भारतीय रेलवे के लिए डीजल की मांग को कम करने की दिशा में एक बेहतर कदम है। फिलहाल LNG ट्रेन को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा रहा है। इसमें रेलवे इसके परफॉर्मेंस, फ्यूल की बचत और पॉल्यूशन में होने वाली कमी को देखेगा। फिर इनके रिजल्ट के बेस पर आगे LNG ट्रेनों को रोज चलाने और दूसरे रूट पर इस्तेमाल करने का फैसला लिया जायेगा।

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