जब हाउसवाइफ हो सकती है तो हाउस-हसबैंड क्यों नहीं? मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर इंटरनेट पर छिड़ी जंग

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा कि जिस तरह महिलाएं घर संभालने की जिम्मेदारी निभा सकती हैं, उसी तरह पुरुष भी घर संभालने का ऑप्शन चुन सकते हैं। दोनों मिलकर घर और परिवार की जिम्मेदारियां बांट सकते हैं।

अपडेटेड Sep 25, 2026 पर 4:40 PM
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हाई कोर्ट ने कहा कि घर संभालने की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की नहीं, पुरुष भी हाउस-हसबैंड बनकर परिवार की जिम्मेदारी निभा सकते हैं।

मद्रास: हाई कोर्ट में वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान मदुरै बेंच के सामने घर और परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया। इस मामले में पति-पत्नी की भूमिका और परिवार को संभालने से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई।

यह मामला तिरुवन्नामलाई के एक डॉक्टर दंपति का था। दोनों की शादी 2011 में हुई थी और उस समय वे पुडुचेरी के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करते थे। 2012 में उनके पहले बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद पत्नी बच्चों की देखभाल के लिए अपने माता-पिता के साथ रहने लगी, जबकि पति ने कार्डियोलॉजी की आगे की पढ़ाई जारी रखी। फिर 2016 में दोनों का दूसरा बच्चा हुआ।

COVID-19 महामारी के बाद दोनों साथ रहने लगे, लेकिन कुछ समय बाद उनके बीच विवाद हो गया। पत्नी ने साथ रहने के लिए फैमिली कोर्ट का रुख किया, जबकि पति ने तलाक की मांग की। फैमिली कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद दोनों ने हाई कोर्ट में अपील की।


कोर्ट ने हाउस-हसबैंड के रोल का जिक्र कुछ इस तरह किया

सुनवाई के दौरान बेंच ने परिवार में अलग-अलग जिम्मेदारियों को लेकर बात की। कोर्ट ने कहा कि परिवार बहुत जरूरी है और घर संभालने के काम को भी कमाई जितनी अहमियत मिलनी चाहिए। साथ ही कहा कि यदि हाउसवाइफ का रोल हो सकता है तो हाउस-हसबैंड का रोल भी हो सकता है। बेंच ने यह भी कहा कि 'होममेकर' (Homemaker) शब्द किसी एक जेंडर को नहीं बताता है। कोर्ट ने घर के काम की कीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कही बात का भी जिक्र किया।

सुनवाई के दौरान पति ने बच्चों की भलाई को ध्यान में रखते हुए पत्नी को 2.5 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई। पत्नी ने भी इस समझौते को स्वीकार कर लिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से दोनों को तलाक दे दिया। कोर्ट के आदेशानुसार पति को तीन महीने के भीतर पत्नी को 1.5 करोड़ रुपये देने हैं। इसके अलावा दोनों बच्चों के नाम पर एक साल के भीतर 50-50 लाख रुपये जमा करने हैं।

कोर्ट की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आए। इसके साथ ही इस मामले ने एक बार फिर यह चर्चा सामने ला दी है कि परिवार में घर और बाहर की जिम्मेदारियां पति-पत्नी दोनों की हो सकती हैं। घर संभालने के काम को भी परिवार की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाना चाहिए।

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