मेघालय में इस साल मौसम ने सबको हैरान कर दिया। 2025 यहां का सबसे गर्म साल रहा। 125 साल के रिकॉर्ड में इतनी गर्मी पहले कभी नहीं पड़ी। लोग गर्मी से परेशान रहे, तो खेती-किसानी पर भी इसका असर दिखा। गर्मी के साथ-साथ मानसून भी कमजोर रहा, बारिश भी सामान्य से काफी कम हुई। जहां बारिश की उम्मीद थी, वहां बादल बरसे ही नहीं। ये खुलासा भारत मौसम विभाग (IMD) की नई रिपोर्ट में हुआ है, जिसने राज्य के मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
PTI के मुताबिक, 2025 में मेघालय का औसत तापमान 20.77 डिग्री रहा, जो 1991 से 2020 के औसत से 0.96 डिग्री ज्यादा है। विभाग ने 1901 से अब तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाला, तो 2025 सबसे गर्म साल निकला।
125 साल में पहली बार इतनी गर्मी
रिपोर्ट कहती है, मेघालय में गर्मी लगातार बढ़ रही है। 1901 से 2025 के बीच हर 100 साल में औसत तापमान 0.73 डिग्री बढ़ा है। दिन का तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ा। अधिकतम तापमान हर सदी में 0.85 डिग्री बढ़ा, जबकि रात का तापमान 0.62 डिग्री बढ़ा। 2025 में रात का तापमान 1901 के बाद सबसे ज्यादा रहा। दिन के तापमान के मामले में ये साल तीसरे नंबर पर रहा। सबसे गर्म 5 सालों में 2025 के बाद 2023, 2024, 2021 और 2022 हैं।
गर्मी के साथ बारिश ने भी किया परेशान
गर्मी के साथ-साथ बारिश ने भी लोगों को परेशान किया। 2025 में मेघालय में मानसून की बारिश सामान्य से 43% कम हुई। मतलब जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उसका सिर्फ 57% ही बरसा। मेघालय की साल भर की बारिश में मानसून का हिस्सा करीब 71.8% होता है। पूरे साल की बात करें तो सामान्य के मुकाबले 73% ही बारिश हुई। मानसून से पहले अच्छी बारिश हो गई थी, इसी वजह से साल भर की कमी थोड़ी कम नजर आई। जून से अक्टूबर तक ज्यादातर महीनों में बारिश कम रही। सबसे ज्यादा कमी जुलाई में दिखी।
कहीं झमाझम बारिश, कहीं सूखे जैसे हालात
राज्य के हर जिले में बारिश एक जैसी नहीं हुई। 11 जिलों में से 6 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई, 3 जिलों में बारिश सामान्य रही। दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई। वहीं पश्चिम जयंतिया हिल्स में बारिश बहुत कम हुई। मौसम विभाग के सूखा मापने वाले पैमाने (SPI) के हिसाब से ईस्ट गारो हिल्स को छोड़कर बाकी सभी जिलों में किसी न किसी स्तर पर सूखे जैसे हालात बने।
चेरापूंजी-मासिनराम में फिर भी जमकर बरसे बादल
कुल बारिश कम होने के बाद भी कुछ जगहों पर तेज बारिश हुई। चेरापूंजी, मासिनराम और शिलांग में कई बार भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। कुछ जगहों पर 24 घंटे में 204.5 मिमी से ज्यादा पानी बरसा। IMD के हिसाब से इतनी बारिश को अत्यधिक भारी बारिश माना जाता है। रिपोर्ट में बाढ़, बिजली गिरने, आंधी-तूफान और ओले गिरने की घटनाओं का भी जिक्र है। यानी एक तरफ बारिश की कमी रही, तो दूसरी तरफ कम समय में बहुत ज्यादा पानी भी बरसा।
किसानों और पानी के लिए क्यों जरूरी है ये रिपोर्ट
ये रिपोर्ट सिर्फ तापमान और बारिश का हिसाब नहीं है। इससे खेती, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और आपदा से निपटने की तैयारी में मदद मिलेगी। हालांकि रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि इस बदलाव से फसल, पानी या लोगों की रोज की जिंदगी पर कितना असर पड़ा। इसके लिए अलग से जांच करनी होगी।
कुल मिलाकर मेघालय के आंकड़े यही बता रहे हैं कि मौसम को समझने के लिए सिर्फ गर्मी नहीं, बारिश कब, कितनी और कहां हुई, ये देखना भी उतना ही जरूरी है।