इतिहास में सिख गुरुओं पर मुगलों की बर्बरता की मिसाल नहीं... NCERT की नई किताब में मुगलों की कट्टरता पर क्या क्या लिखा?

NCERT की कक्षा 9 की नई सोशल साइंस किताब में मुगल शासन और सिख गुरुओं के इतिहास को नए तरीके से शामिल किया गया है। इसमें 7वीं सदी से भारत पर हुए आक्रमणों और युद्धों में धार्मिक परंपराओं की भूमिका का भी जिक्र किया गया है।

अपडेटेड Sep 30, 2026 पर 8:43 AM
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NCERT की नई किताब में मुगलों और सिख गुरुओं का इतिहास: 7वीं सदी के आक्रमण से अकाल तख्त तक

नई दिल्ली। NCERT ने क्लास 9 की सोशल साइंस की नई किताब में इतिहास पढ़ाने का तरीका बदल दिया है। नई किताब 'Understanding Society India and Beyond - Part 2' में एक पूरा चैप्टर 'Resistance and Resilience' जोड़ा गया है।

ये किताब मंगलवार को रिलीज हुई है, जबकि सेशन शुरू हुए 6 महीने हो चुके हैं। इस चैप्टर में सिख गुरुओं और मुगल शासन के बीच हुए संघर्ष के साथ 7वीं सदी से भारत पर हुए आक्रमणों और युद्ध में धार्मिक परंपराओं की भूमिका का भी जिक्र किया गया है।

किताब में मुगलों पर क्या लिखा है?


किताब में साफ लिखा है कि सिख गुरुओं के खिलाफ मुगल राज्य की कार्रवाई सिर्फ सियासी नहीं थी।

किताब के शब्दों में - "सिख गुरुओं, खासकर गुरु अर्जन देव, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के खिलाफ मुगल राज्य की बर्बरता की इतिहास में बहुत कम तुलना है। ये कार्रवाई मुगलों की कठोर धार्मिक और भेदभावपूर्ण नीतियों में गहरी जड़ी हुई थी।"

NCERT के मुताबिक, 17वीं सदी की शुरुआत में जैसे-जैसे सिख गुरुओं का सामाजिक प्रभाव बढ़ा, मुगलों ने उनके मामलों में दखल देना शुरू कर दिया।

तीन गुरुओं की कहानी से समझाया टर्निंग पॉइंट

  1. गुरु अर्जन देव जी: जहांगीर ने अपने बागी बेटे खुसरू मिर्जा को मदद देने का आरोप लगाकर उन्हें फांसी का आदेश दिया। किताब इसे सिख इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बताती है। इसके बाद ही सिख समुदाय ने संगठन पर जोर दिया।
  2. गुरु हरगोबिंद जी: जहांगीर ने ही उन्हें ग्वालियर किले में कैद किया था। किताब में लिखा है कि किले के बाहर बड़ी संख्या में सिख उनके सम्मान में इकट्ठा होते थे। यहीं से अकाल तख्त और मिरी-पीरी यानी आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों सत्ता की अवधारणा की शुरुआत हुई।
  3. गुरु तेग बहादुर जी: 1675 में औरंगजेब के आदेश पर उनकी शहादत हुई। NCERT ने इसे "भारतीय इतिहास का टर्निंग पॉइंट" बताया है। क्यों जोड़ा गया ये चैप्टर?

किताब का मकसद ये बताना है कि कैसे उत्पीड़न का सामना "सामूहिक संगठन और जरूरत पड़ने पर सशस्त्र प्रतिरोध" से किया गया। चैप्टर में 7वीं सदी से भारत पर हुए आक्रमणों और युद्ध में धार्मिक परंपराओं की भूमिका को भी डॉक्यूमेंट किया गया है। इसमें बताया गया है कि ऐसे समय में सामूहिक संगठन, अपनी पहचान और परंपराओं को बनाए रखने के साथ जरूरत पड़ने पर सशस्त्र प्रतिरोध भी एक रास्ता रहा। सिख गुरुओं से जुड़ी घटनाओं के जरिए इस बदलाव को ऐतिहासिक घटनाक्रम के तौर पर समझाया गया है।

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