बर्लिन (जर्मनी): जर्मनी की राजधानी बर्लिन में चल रहे InnoTrans 2026 में NCRTC ने भारत के पहले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ‘नमो भारत’ को पेश किया है। भारत की तेज और आधुनिक रेल व्यवस्था अब विदेशी मंच पर भी अपनी पहचान बना रही है। यहां नमो भारत से दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और बदलती रीजनल मोबिलिटी को दिखाया जा रहा है। यह इवेंट 22 से 25 सितंबर तक चल रहा है, जहां दुनिया भर की नई ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही है।
बर्लिन में दिखाई गई नमो भारत की तस्वीर
InnoTrans 2026 में NCRTC ने 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को दिखाया गया है। यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक जाता है। फरवरी में पूरे कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच आने-जाने का तरीका बदल रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद तेज सफर देने के साथ इलाकों को जोड़ना भी है।
नमो भारत से कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी में हुए ये बदलाव
बड़े शहरों में नौकरी और विकास के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए नमो भारत अहम भूमिका निभा रहा है। रीजनल रेल की मदद से लोगों को नौकरी के लिए बड़े शहर में जाकर रहने की जरूरत कम हो सकती है, क्योंकि दिल्ली आसपास के शहरों से आसानी से जुड़ रही है। 82 किलोमीटर के इस रूट पर रोज करीब 1 से 2 लाख यात्री सफर कर रहे हैं। इससे दिल्ली जैसे बड़े शहर पर भीड़ का दबाव कम करने के साथ आसपास के इलाकों में विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है। नमो भारत में सफर को तेज और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। NCRTC के मैनेजिंग डायरेक्टर शलभ गोयल के मुताबिक, इसमें LTE पर ETCS हाइब्रिड लेवल 3 सिग्नलिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मेरठ मेट्रो भी चलती है, जिससे एक ही सिस्टम के जरिए रीजनल और लोकल ट्रांसपोर्ट को जोड़ने की कोशिश की गई है।
नमो भारत को शुरू होने के बाद पैसेंजर का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। कॉरिडोर पर अब तक 4.5 करोड़ से ज्यादा पैसेंजर सफर कर चुके हैं। हाल ही में एक दिन में 1.68 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स के सफर करने का रिकॉर्ड भी बना।