नागोया। हरियाणा के जींद की रहने वाली नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह इंडिविजुअल शॉटगन में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। लेकिन उनकी इस कामयाबी की शुरुआत काफी साधारण तरीके से हुई थी।
नीरू ने अपने चचेरे भाई लक्ष्य शेरॉन की कामयाबी से इंस्पायर होकर शूटिंग शुरू की। 2019 में भोपाल आने के बाद उनकी किस्मत बदली। उन्हें मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग एकेडमी से मुफ्त बंदूक और गोलियां मिलीं। नीरू के पिता किसान हैं, इसलिए परिवार के लिए महंगे शॉटगन खेल का खर्च उठाना आसान नहीं था। एकेडमी की मदद से ही वह इस खेल में टिक पाईं। इस साल उन्होंने लोनाटो, इटली में वर्ल्ड कप मेडल भी जीता था।
चुनौतियों के बीच खुद को ऐसे किया तैयार
एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू की तबीयत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वह पूरा ट्रेनिंग कैंप भी नहीं कर पाईं और पांच दिनों तक कुछ नहीं खाया। इस दौरान कोच मनशेर सिंह उनके कांटेक्ट में रहे और उन्हें फोकस बनाए रखने के लिए मोटिवेट करते रहे। नागोया में बारिश और ठंड के कारण बंदूक की ग्रिप पर भी असर पड़ा, लेकिन नीरू ने खुद से बात करके अपना कंसंट्रेशन बनाए रखा।
मुकाबले से पहले नीरू ने अपनी तैयारी का रूटीन नहीं बदला। क्वालिफिकेशन में 95 स्कोर के साथ टॉप करने के बाद उन्होंने खाने और नींद का खास ध्यान रखा। नागोया में उन्हें दाल और रोटी पसंद थी, जिसे वह एक बांग्लादेशी रेस्टोरेंट से मंगाती थीं।
गोल्ड जीतकर जवानों को किया याद
गोल्ड जीतने के बाद नीरू ने अपना मेडल भारतीय सेना के जवानों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सैनिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान देते हैं। उन्होंने यह मेडल पूर्व एशियन गेम्स चैंपियन राजा रंजीत सिंह को भी समर्पित किया, जिनका इस साल निधन हो गया।
नीरू को उम्मीद है कि उनकी इस जीत से भारत के युवा शॉटगन शूटर्स को बड़े सपने देखने की हिम्मत मिलेगी।