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भोपाल के तालाब पर टिन के डिब्बे पर लगाती थीं निशाना, उधार की बंदूक से शुरू की प्रैक्टिस! गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा की कहानी

जींद की नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। उधार की बंदूक से शूटिंग शुरू करने वाली नीरू ने बीमारी और मुश्किल हालात के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखी। उन्होंने अपना मेडल समर्पित किया।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 30, 2026 पर 12:09 PM
भोपाल के तालाब पर टिन के डिब्बे पर लगाती थीं निशाना, उधार की बंदूक से शुरू की प्रैक्टिस! गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा की कहानी
उधार की बंदूक से शुरू हुआ नीरू ढांडा का सफर एशियन गेम्स के गोल्ड तक पहुंचा।

नागोया। हरियाणा के जींद की रहने वाली नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह इंडिविजुअल शॉटगन में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। लेकिन उनकी इस कामयाबी की शुरुआत काफी साधारण तरीके से हुई थी।

नीरू ने अपने चचेरे भाई लक्ष्य शेरॉन की कामयाबी से इंस्पायर होकर शूटिंग शुरू की। 2019 में भोपाल आने के बाद उनकी किस्मत बदली। उन्हें मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग एकेडमी से मुफ्त बंदूक और गोलियां मिलीं। नीरू के पिता किसान हैं, इसलिए परिवार के लिए महंगे शॉटगन खेल का खर्च उठाना आसान नहीं था। एकेडमी की मदद से ही वह इस खेल में टिक पाईं। इस साल उन्होंने लोनाटो, इटली में वर्ल्ड कप मेडल भी जीता था।

चुनौतियों के बीच खुद को ऐसे किया तैयार

एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू की तबीयत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वह पूरा ट्रेनिंग कैंप भी नहीं कर पाईं और पांच दिनों तक कुछ नहीं खाया। इस दौरान कोच मनशेर सिंह उनके कांटेक्ट में रहे और उन्हें फोकस बनाए रखने के लिए मोटिवेट करते रहे। नागोया में बारिश और ठंड के कारण बंदूक की ग्रिप पर भी असर पड़ा, लेकिन नीरू ने खुद से बात करके अपना कंसंट्रेशन बनाए रखा।

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