NEET UG परीक्षा के तरीके में बदलाव को लेकर स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर है। साल 2027 में भी स्टूडेंट पहले की तरह पेन-एंड-पेपर से परीक्षा दे सकते हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प भी मिल सकता है।
NEET UG परीक्षा के तरीके में बदलाव को लेकर स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर है। साल 2027 में भी स्टूडेंट पहले की तरह पेन-एंड-पेपर से परीक्षा दे सकते हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प भी मिल सकता है।
केंद्र सरकार NEET UG को धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने पर विचार कर रही है। लेकिन तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। ऐसे में 2027 की परीक्षा के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इससे स्टूडेंट्स को अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा का तरीका चुनने का मौका मिल सकता है।
1. ऑनलाइन परीक्षा (CBT): उम्मीदवार कंप्यूटर के जरिए सवालों के जवाब देंगे।
2. पेन-एंड-पेपर परीक्षा: स्टूडेंट पहले की तरह प्रश्नपत्र पर सवाल पढ़कर OMR शीट पर जवाब भर सकेंगे।
इसका मकसद परीक्षा को एकदम से ऑनलाइन करने के बजाय स्टूडेंट्स और राज्यों को नए तरीके के लिए तैयार होने का समय देना है। तमिलनाडु और केरल ने भी पूरी परीक्षा कंप्यूटर पर कराने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे गांवों में रहने वाले और कम आमदनी वाले परिवारों के बच्चों को परेशानी हो सकती है।
इसके पीछे कुछ मुख्य वजहें हैं:
• कंप्यूटर और इंटरनेट की कमी: गांवों और दूर-दराज के इलाकों में कई स्टूडेंट्स के पास कंप्यूटर और अच्छा इंटरनेट नहीं है। ऐसे में उनके लिए ऑनलाइन परीक्षा देना मुश्किल हो सकता है।
• स्कूल के सिलेबस में अंतर: राज्य बोर्ड और CBSE के पढ़ाई के तरीके में अंतर है। इससे कुछ स्टूडेंट्स को NEET की तैयारी में परेशानी हो सकती है।
• ऑनलाइन परीक्षा की जानकारी: ऑनलाइन परीक्षा शुरू करने से पहले स्टूडेंट्स को कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देने और परीक्षा का तरीका समझने का मौका मिलना चाहिए।
• परीक्षा केंद्रों की कमी: देशभर में ऑनलाइन परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त कंप्यूटर और अच्छी सुविधाओं वाले केंद्र तैयार करना भी जरूरी है।
परीक्षा में सुधार के लिए किया दो फेज का प्लान
तमिलनाडु ने 2021 की जस्टिस ए.के. राजन समिति की रिपोर्ट का जिक्र किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि NEET की वजह से सरकारी स्कूलों, तमिल माध्यम से पढ़ने वाले और गरीब परिवारों के स्टूडेंट्स को दिक्कत हो सकती है। राज्यों का कहना है कि मेडिकल में दाखिले के समय स्कूल के नंबरों को भी महत्व मिलना चाहिए, ताकि हर बोर्ड के स्टूडेंट्स को बराबर मौका मिल सके।
पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई है। इस टीम ने परीक्षा में सुधार के लिए दो चरण तय किए हैं। पहले चरण में NEET UG 2027 के लिए बदलाव किए जाएंगे और दूसरे चरण में 2028-29 से नई व्यवस्था लागू करने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, टीम को छात्रों और अभिभावकों से 54 हजार से ज्यादा सुझाव मिले हैं। अब टीम अपनी रिपोर्ट देने से पहले राज्य सरकारों से भी बात कर सकती है।
आगे चलकर ऑनलाइन हो सकती है परीक्षा व्यवस्था
आगे चलकर NEET की परीक्षा भी JEE की तरह अलग-अलग शिफ्ट में हो सकती है। इसके बाद ऐसी ऑनलाइन परीक्षा शुरू करने पर विचार किया जा सकता है, जिसमें स्टूडेंट के जवाबों के हिसाब से अगले सवाल आसान या मुश्किल होंगे। केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टीम का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। इससे टीम को राज्य सरकारों से बात करने और अपने सुझाव तैयार करने के लिए और समय मिल सकेगा।
ध्यान दें: NEET UG 2027 में हाइब्रिड मॉडल लागू होगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। स्टूडेंट्स को परीक्षा के तरीके से जुड़ी पक्की जानकारी के लिए NTA की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।
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