मयूरभंज: ओडिशा के सिमिलिपाल जंगल से एक ऐसी खबर आई है, जिसने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। यहां बिच्छू की एक नई प्रजाति पाई गई है। जिसका नाम रखा गया है - लियोकेल्स सिमिलिपालेन्सिस। यह नाम जंगल के नाम पर ही रखा गया है।
मयूरभंज: ओडिशा के सिमिलिपाल जंगल से एक ऐसी खबर आई है, जिसने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। यहां बिच्छू की एक नई प्रजाति पाई गई है। जिसका नाम रखा गया है - लियोकेल्स सिमिलिपालेन्सिस। यह नाम जंगल के नाम पर ही रखा गया है।
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खोज में सिमिलिपाल टाइगर प्रोजेक्ट की टीम ( Similipal Tiger Project) और महाराष्ट्र स्थित ठक्कर वाइल्डलाइफ फाउंडेशन ( Thakkar Wildlife Foundation ) के वैज्ञानिक ने मिलकर काम किया। इस अध्ययन का नेतृत्व सौरभ किनिंगे (Saurabh Kininge), तेजस ठाकरे (Tejas Thackeray) और अक्षय खांडकेर (Akshay Khandekar) ने किया। इनके साथ सिमिलिपाल के फील्ड डायरेक्टर डॉ. प्रकाश चंद्र गोगिनेनी (Dr. Prakash Chandra Gogineni) भी शामिल रहे।
कैसे मिला ये नया बिच्छू?
इस खोज की शुरुआत जंगल के कर्मचारियों से हुई। वे रोज की तरह जंगल में गश्त पर थे। तभी उन्हें एक अलग सा बिच्छू दिखा। रंग और बनावट थोड़ी अलग लगी तो उन्होंने उसे ध्यान से पकड़ा और जांच के लिए भेज दिया। इसके बाद महाराष्ट्र की ठक्कर वाइल्डलाइफ फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने इसकी जांच की। सिमिलिपाल टाइगर प्रोजेक्ट की टीम भी इस काम में साथ थी। जांच के बाद पता चला कि ये तो बिल्कुल नई प्रजाति है। इस खोज के बाद इस समूह में अब कुल सात प्रजातियां हो गई हैं।
काला शरीर और नीली चमक, बिल्कुल अलग है ये बिच्छू
ये बिच्छू ज्यादा बड़ा नहीं है। इसकी लंबाई करीब 4 से 5 सेंटीमीटर है। शरीर का रंग काला है, लेकिन रोशनी में उस पर नीली सी चमक दिखती है। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। ये बिच्छू करीब 1000 मीटर की ऊंचाई पर मिला है। वहां नम जंगल है और जमीन पर पत्थर भी हैं। वैज्ञानिकों ने इसके पैरों पर बहुत बारीक बाल देखे। इन्हीं से पता चला कि ये बाकी बिच्छुओं से अलग है।
अभी सिर्फ सिमिलिपाल में ही मिला है बिच्छू
अभी तक ये नया बिच्छू सिर्फ सिमिलिपाल में ही मिला है। क्या ये देश के और जंगलों में भी है? ये अभी किसी को नहीं पता। वैज्ञानिक अब और जगहों पर जाकर इसकी तलाश करेंगे। डीएनए जांच भी की जाएगी, ताकि पता चल सके कि ये बाकी प्रजातियों से कितना अलग है और इसका परिवार क्या है।
जंगल की सेहत के लिए छोटे जीव भी जरूरी
सिमिलिपाल को लोग बाघ और हाथी के लिए जानते हैं। लेकिन ये खोज बताती है कि जंगल में छोटे-छोटे जीव भी उतने ही खास हैं। बिच्छू जंगल में कीड़ों की संख्या को काबू में रखते हैं। इससे जंगल का संतुलन बना रहता है।
ये खोज ये भी बताती है कि हमारे जंगलों में अभी भी कई ऐसे जीव छिपे हैं, जिनके बारे में हमें पता ही नहीं है। इसलिए सिर्फ बड़े जानवरों को ही नहीं, इन छोटे जीवों को भी बचाना जरूरी है।
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