Noida DM Medha Roopam: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (23 सितंबर) को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (Noida DM) मेधा रूपम को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपनी सैलरी से पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रूपम की याचिका पर नोटिस जारी किया। साथ ही चौधरी की हिरासत को रद्द करने के हाई कोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी।
शीर्ष अदालत ने रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश पारित किए। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, पीठ ने जिलाधिकारी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो रही सुनवाई की आवाज म्यूट (बंद) कर दी। पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश में जिलाधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी।
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, "सभी पक्षों के वरिष्ठ वकीलों को सुनने के बाद इस अदालत की राय है कि जब तक मामले की गुण-दोषों के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक फैसले के अमल पर, विशेष रूप से पैरा नंबर 27 से 33 तक, रोक रहेगी।" अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात अक्टूबर की तारीख तय की। हाई कोर्ट ने दो सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की ग्रेजुएट 25 वर्षीय आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया था। उसे अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में NSA के तहत हिरासत में लिया गया था।
अदालत ने रूपम द्वारा हिरासत का आदेश पारित करने के तरीके की कड़ी आलोचना की। साथ ही चेतावनी दी कि "मनमानी करने वाली" नौकरशाही का लगातार "तानाशाही" वाला व्यवहार उत्तर प्रदेश को ऑर्वेलियन डिस्टोपिया (एक दमनकारी और भयावह समाज) में बदल सकता है। अदालत ने चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजe देने का भी आदेश दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि यह रकम रूपम (जिन्होंने हिरासत का आदेश जारी किया था) और SHO तक इस मामले में जिम्मेदार दूसरे अधिकारियों की सैलरी से वसूली जाए।
9 सितंबर को सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हिरासत के आदेश को रद्द करने वाले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। चौधरी को नोएडा में मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अरेस्ट किया गया था। बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 13 मई को उन पर और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्य वर्मा पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।