नोएडा: नोएडा के छोटे और मध्यम उद्योग बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रहे हैं। नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले 18 महीनों में भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के बीच पॉलीमर, मेटल, कॉपर, इलेक्ट्रिकल सामान, सोल्डर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और ईंधन जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में 150 से 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन और उपाध्यक्ष सुधीर के मुताबिक, कच्चे माल और ईंधन की लागत बढ़ने से उद्योगों में उत्पादन पर असर पड़ा है। खासकर छोटे उद्योगों के लिए बढ़ते खर्च के बीच बाजार में मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
बढ़ते खर्च से छोटे उद्योगों का कारोबार मुश्किल में
नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन और उपाध्यक्ष सुधीर के मुताबिक, कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उत्पादन का खर्च बढ़ रहा है, जबकि उद्योगों के लिए उसी हिसाब से अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाना आसान नहीं है। इसका असर उद्योगों के पास कारोबार चलाने के लिए उपलब्ध पैसों पर भी पड़ रहा है। छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने कर्मचारियों की लागत, बिजली, ईंधन और दूसरे खर्चों के साथ महंगे कच्चे माल का बोझ बढ़ गया है। उद्यमियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कई छोटी औद्योगिक इकाइयों के पास कारोबार बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। इससे रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
एक साल के लिए GST घटाकर 5% करने की मांग
नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ने सरकार से औद्योगिक उत्पादों पर लगने वाली 18 प्रतिशत GST दर को एक साल के लिए घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे मुश्किलों का सामना कर रहे उद्योगों को तुरंत राहत मिल सकती है। उद्यमियों के मुताबिक, GST में कुछ समय के लिए कटौती से कारोबार में पैसों की कमी का दबाव कम होगा और उद्योगों को उत्पादन जारी रखने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि अगर उद्योग चलते रहे तो वे आगे भी GST और दूसरे करों का भुगतान करते रहेंगे, जबकि इकाइयां बंद होने पर सरकार की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।
उद्योगों को राहत मिलेगी तो रोजगार भी बचेंगे
एसोसिएशन ने सरकार से कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग की है। उद्यमियों का कहना है कि नोएडा जैसे औद्योगिक शहरों में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग लोगों को रोजगार देते हैं और सप्लाई चेन से जुड़े हैं। यदि खर्च का दबाव कम होता है तो ये इकाइयां बाजार में मुकाबला करते हुए उत्पादन जारी रख सकती हैं। एसोसिएशन के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में 150 से 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है और कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। नोएडा से सुमित राजपूत की रिपोर्ट।