भारत से ट्रेड बंद होने पर टूटी पाकिस्तान की कमर! गंवा चुका 40 अरब डॉलर, कारोबारी बोले- फिर से खोलो रास्ता

पाकिस्तान-इंडिया बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी का अनुमान है कि 2019 में भारत से ट्रेड रुकने के बाद पाकिस्तान करीब 40 अरब डॉलर गंवा चुका है। उन्होंने इस्लामाबाद से ट्रेड पर लगी रोक पर दोबारा सोचने की अपील की है।

अपडेटेड Nov 03, 2026 पर 9:10 AM
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2019 में भारत से ट्रेड रुकने के बाद पाकिस्तान करीब 40 अरब डॉलर गंवा चुका है।

पाकिस्तान के कारोबारी जगत से एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी का अनुमान है कि 2019 में भारत के साथ ट्रेड रुकने के बाद से पाकिस्तान को करीब 40 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, कसूरी ने इस्लामाबाद से अपील की है कि वह भारत के साथ कारोबार पर लगी रोक पर दोबारा विचार करे। उनकी दलील है कि रिश्ते बहाल हुए तो कारोबारियों का खर्च घटेगा और जरूरी सामान आसानी से मिल सकेगा।

पुलवामा के बाद बंद हुआ रास्ता

2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ। उसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा और कारोबारी रिश्ते सस्पेंड कर दिए गए। करीब 7 साल से ये रोक जारी है और इसका असर अब पाकिस्तान की इंडस्ट्री पर साफ नजर आ रहा है।


इसे एक आम घर के उदाहरण से समझिए। मोहल्ले में ही राशन की बड़ी दुकान हो, लेकिन किसी वजह से वहां से खरीदारी बंद करनी पड़े। अब वही आटा, चीनी और तेल दूसरे शहर से मंगाना पड़ेगा। सामान वही होगा, लेकिन किराया बढ़ेगा, इंतजार लंबा होगा और महीने का बजट बिगड़ जाएगा। पाकिस्तानी कंपनियों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है।

भारत से सप्लाई रुकने के बाद पाकिस्तानी कारोबारियों को कच्चा माल, खेती से जुड़े प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्रियल सप्लाई के लिए दूर के बाजारों पर निर्भर होना पड़ा। इससे फ्रेट चार्ज बढ़ा, ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ा और सामान पहुंचने में भी ज्यादा वक्त लगने लगा। पाकिस्तान पहले से लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहा है। ऐसे में इंपोर्ट का ये अतिरिक्त बोझ उन इंडस्ट्रीज के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है, जिन्हें सस्ती और समय पर सप्लाई चाहिए।

दवा कंपनियों के हर साल 2 से 3 अरब डॉलर बच सकते हैं

भारत से दूरी का सबसे ज्यादा असर जिन सेक्टरों पर पड़ा है, उनमें पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री भी शामिल है। कसूरी के मुताबिक, भारत से सप्लाई न मिलने की वजह से ये इंडस्ट्री दबाव में आई है।

उनका अनुमान है कि अगर पाकिस्तान की दवा कंपनियां भारत से कच्चा माल लेने लगें, तो वे हर साल 2 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर तक बचा सकती हैं। ये बचत एक-दो बार की नहीं, बल्कि सालाना है। यानी जितने साल ट्रेड बंद रहता है, उतने साल ये रकम इंडस्ट्री के हाथ से निकलती रहती है।

दवा बनाने में कच्चे माल की कीमत और उसकी समय पर उपलब्धता दोनों बहुत मायने रखती हैं। सप्लाई जितनी दूर से आएगी, लागत उतनी ऊपर जाएगी। कसूरी इसी लागत को घटाने के लिए भारत के साथ कारोबार खोलने की बात कर रहे हैं।

कपास की कमी ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर डाला 5 अरब डॉलर का बोझ

पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर देश के अहम एक्सपोर्ट वाले सेक्टरों में से एक है। लेकिन भारत से ट्रेड रुकने के बाद इस सेक्टर का खर्च भी बढ़ गया है।

कसूरी बताते हैं कि पाकिस्तान में कपास का उत्पादन घट रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए टेक्सटाइल मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका से कपास इंपोर्ट करनी पड़ रही है। इस बदलाव की वजह से सेक्टर को करीब 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है।

कसूरी ने एक और चिंता जताई है। पाकिस्तान में कपास की खेती का रकबा लगातार घट रहा है। जिन इलाकों में परंपरा से कपास उगाई जाती रही है, वहां के किसान अब तेजी से गन्ने की खेती की ओर मुड़ रहे हैं। इससे देश में कपास की उपलब्धता पर असर पड़ा है और इंडस्ट्री की इंपोर्ट पर निर्भरता और बढ़ गई है। कसूरी ने कपास का उत्पादन दोबारा बढ़ाने के लिए बेहतर कृषि नीतियों की मांग की है, ताकि सेक्टर को विदेशी बाजारों पर कम टिकना पड़े। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इस वक्त महंगे कच्चे माल और सप्लाई चेन की रुकावटों, दोनों से जूझ रही है।

पेट्रोलियम से खाद तक, सब कुछ दूर के बाजारों से

मामला सिर्फ दवा और कपड़े तक सीमित नहीं है। कसूरी के मुताबिक, पाकिस्तान चीनी, फर्टिलाइजर, सीमेंट, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी जैसी कई चीजें दूर के बाजारों से इंपोर्ट कर रहा है। जबकि इन सभी सेक्टरों में भारत के पास बड़ी प्रोडक्शन क्षमता मौजूद है।

उनकी दलील सीधी है। भारत भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के करीब है, इसलिए वहां से सामान लेना सस्ता पड़ सकता है और जरूरी चीजें कम समय में पहुंच सकती हैं।

पेट्रोलियम का उदाहरण इसे और साफ करता है। कसूरी के मुताबिक, भारत की ऑयल रिफाइनरियां पाकिस्तान के कई मौजूदा सप्लायर्स के मुकाबले उसके ज्यादा करीब हैं। ऐसे में अगर पेट्रोलियम ट्रेड फिर से शुरू होता है, तो पाकिस्तानी कारोबारियों को सस्ती और तेज सप्लाई मिल सकती है।

कसूरी का यह भी कहना है कि भारत के खेती और इंडस्ट्री से जुड़े प्रोडक्ट्स तक बेहतर पहुंच मिलने से पाकिस्तान के कई सेक्टरों में प्रोडक्शन की लागत घट सकती है। जब कच्चा माल पास से मिलता है, तो उसका फायदा पूरी चेन को मिलता है, फैक्ट्री से लेकर बाजार तक।

सियासत और कारोबार को अलग रखने की अपील

पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन ने दोनों देशों की सरकारों से गुजारिश की है कि आर्थिक सहयोग को राजनीतिक मतभेदों से अलग रखा जाए। उनका मानना है कि कारोबारी रिश्ते सरहद के दोनों तरफ के कारोबारियों के लिए नए मौके खोल सकते हैं।

कसूरी का कहना है कि जो राजनीतिक विवाद बाकी हैं, उन्हें बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए, न कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच आर्थिक लेन-देन रोका जाए।

उनके मुताबिक, ट्रेड बहाल होने का फायदा सिर्फ इंपोर्ट का खर्च घटने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे निवेश, टूरिज्म और बड़े स्तर पर क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

टूरिज्म को लेकर कसूरी ने खास तौर पर भारतीय सैलानियों का जिक्र किया। उनका कहना है कि भारत से ऐसे लोग पाकिस्तान आ सकते हैं, जो धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें देखना चाहते हैं या फिर अपने पुरखों के घर और गांव से दोबारा जुड़ना चाहते हैं।

क्षेत्रीय सहयोग की बात करते हुए कसूरी ने श्रीलंका का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने उसे वित्तीय मदद दी थी। उनके मुताबिक, ये दिखाता है कि मुश्किल वक्त में पड़ोसी देश एक-दूसरे का साथ कैसे दे सकते हैं।

PTI ने कसूरी के हवाले से कहा, "पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं, जो बेहतर संबंधों की नींव बन सकते हैं।"

पाकिस्तान में क्यों तेज हो रही है ट्रेड खोलने की आवाज

पाकिस्तान का कारोबारी समुदाय अब खुलकर बता रहा है कि भारत के साथ ट्रेड बंद रखने की उसे क्या कीमत चुकानी पड़ रही है। इस रोक की वजह से घरेलू इंडस्ट्री को अपने पड़ोस से आगे जाकर सप्लाई ढूंढनी पड़ी है। नतीजा ये कि ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ा और दूर के एक्सपोर्टर्स पर निर्भरता भी बढ़ती चली गई।

कसूरी की ये अपील ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तानी कारोबारी इंपोर्ट का खर्च घटाने, सप्लाई चेन सुधारने और उन सेक्टरों को फिर से खड़ा करने के रास्ते तलाश रहे हैं, जो बढ़ी हुई प्रोडक्शन लागत से जूझ रहे हैं।

इस्लामाबाद के लिए बिजनेस काउंसिल का 40 अरब डॉलर वाला अनुमान इस लंबी रोक के आर्थिक असर का एक नया पहलू सामने रखता है। ट्रेड दोबारा शुरू करने की मांग बताती है कि पाकिस्तान के कारोबारी जगत में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि भौगोलिक रूप से सबसे करीबी बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक को सप्लाई चेन से बाहर रखना कितना महंगा पड़ रहा है।

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