पटना शहर के कचरे का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए होगा। इसके लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट लगाने की तैयारी है। नवंबर तक शहर को कचरे के ढेर से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। शहर के 13 नगर निकायों के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए होगा।

पटना शहर के कचरे का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए होगा। इसके लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट लगाने की तैयारी है। नवंबर तक शहर को कचरे के ढेर से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। शहर के 13 नगर निकायों के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए होगा।
2 फायदे मिलेंगे एक ही प्रोजेक्ट से
वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट 15 मेगावाट क्षमता का होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस प्लान से एक तरफ शहर को कचरामुक्त बनाने में मदद मिलेगी तो दूसरी तरफ कचरे का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए होगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि परियोजना की प्रगति, पुराने कचरे के निस्तारण और निर्माण कार्य की तैयारियों की लगातार समीक्षा हो रही है
21 एकड़ जमीन से हट चुका है कचरा
पटना के रामचक बैरिया में सबसे बड़ी चुनौती वर्षों से जमा कचरे का निस्तारण है। इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन तैयार करने वास्ते कई एजेंसियों को लीगेसी वेस्ट के उपचार का जिम्मा दिया गया है। पटना नगर निगम ने नैकॉफ को 6 लाख घनमीटर लीगेसी वेस्ट के निष्पादन के साथ 22 एकड़ जमीन खाली कराने का ऑर्डर इश्यू किया था। एजेंसी अब तक करीब 21 एकड़ जमीन खाली करा चुकी है। वहीं ईकोस्टान करीब 14 एकड़ जमीन पर जमा 8 लाख घनमीटर कचरे का बायोरीमीडियेशन कर रही है। कंपनी अब तक लगभग 1.5 लाख घनमीटर कचरे का निष्पादन कर चुकी है। पाथ्या को 7 एकड़ जमीन पर जमा करीब 5 लाख घनमीटर लीगेसी वेस्ट के निष्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। यहां लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
15 मेगावाट बिजली बनेगी कचरे से
रामचक बैरिया में बनने वाली यह परियोजना केवल कचरे को ठिकाने लगाने तक सीमित नहीं होगी। यहां कचरे की छंटाई, पुनर्चक्रण, जैविक कचरे के प्रसंस्करण से लेकर बिजली उत्पादन तक की एकीकृत व्यवस्था विकसित की जाएगी। परियोजना के तहत 15 मेगावाट क्षमता का वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। इसमें उपयुक्त कचरे का प्रसंस्करण कर बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
100 टन क्षमता का बायो-मीथेनेशन प्लांट
100 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-मीथेनेशन प्लांट भी लगेगा, जहां गीले कचरे से बायोगैस और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। कचरे से उपयोगी सामग्री अलग करने के लिए 250-250 टन प्रतिदिन क्षमता वाली तीन मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सह आरडीएफ केंद्र भी बनाए जाएंगे। इसके साथ 50 टन प्रतिदिन क्षमता की एक अतिरिक्त मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी होगी। गीले कचरे से खाद बनाने के लिए 700 टन प्रतिदिन क्षमता का कम्पोस्टिंग प्लांट और उपचार के बाद बचने वाले कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए 325 टन प्रतिदिन क्षमता का इंजीनियर्ड सैनिटरी लैंडफिल भी प्रस्तावित है।
13 नगर निकायों का कचरा एक ही जगह होगा प्रबंधित
इस परियोजना के तहत पटना क्लस्टर के 13 नगर निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे का एकीकृत प्रबंधन रामचक बैरिया में किया जाएगा। इसमें पटना नगर निगम के अलावा दानापुर निजामत नगर परिषद, फतुहा, खगौल, फुलवारी, बख्तियारपुर, मसौढ़ी, बिहटा, संपतचक, मनेर नगर परिषद, नौबतपुर, पुनपुन और खुसरूपुर नगर निकाय शामिल हैं। इन इलाकों से निकलने वाला कचरा केवल लैंडफिल में जमा करने के बजाय उसकी छंटाई, पुनर्चक्रण, खाद और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जाएगा।
514 करोड़ की लागत से बनेगा पूरा परिसर
पटना नगर निगम से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 514.59 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य को निर्धारित दो वर्ष छह महीने की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूरा होने के बाद चयनित एजेंसी को पूरे परिसर के संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी 20 वर्षों तक दी जाएगी।
(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)
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