सूर्य की चाल से समय का अंदाजा लगाना हो या धरती के घूमने की स्पीड को करीब से समझना, अब इन वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानने के लिए सिर्फ किताबों के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं होगी। बिहार की राजधानी पटना के इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर यानी तारामंडल में कुछ ऐसा ही खास इंतजाम होने जा रहा है। यहां विज्ञान को देखकर, समझकर और अनुभव करके सीखा जा सकेगा। यहां एस्ट्रो पार्क और मॉडर्न ऑब्जर्वेटरी डोम बनाया जा रहा है। यह पहल खास तौर पर स्टूडेंट्स, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों और विज्ञान को करीब से जानने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
क्या क्या होगा एस्ट्रो पार्क के खास
इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित तारामंडल परिसर में बन रहे एस्ट्रो पार्क सूर्य घड़ी की थीम पर आधारित होगा। यहां11 इंटरैक्टिव साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके माध्यम से दर्शक सूर्यघड़ी, पृथ्वी की घूर्णन गति और समय की गणना जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे। यानी विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और क्लास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि दर्शकों को उसे अपनी आंखों से देखने और अनुभव करने का मौका भी मिलेगा।
सूर्य घड़ी से समझेंगे समय का विज्ञान
एस्ट्रो पार्क में अब तक दो साइंस मॉडल लगाए जा चुके हैं। इनमें इंटरैक्टिव सन डायल और वर्टिकल सन डायल शामिल हैं। ये मॉडल सूर्य की स्थिति और छाया के आधार पर समय की गणना जैसे सिद्धांतों को समझने में मदद करेंगे। सन डायल यानी सूर्य घड़ी समय मापने की प्राचीन वैज्ञानिक विधियों में से एक है। सूर्य की स्थिति बदलने के साथ छाया की दिशा और लंबाई में होने वाले बदलाव से समय का अनुमान लगाया जाता है। एस्ट्रो पार्क में ऐसे मॉडलों के जरिये स्टूडेंट्स यह समझ सकेंगे कि आधुनिक घड़ियों के प्रचलन से पहले समय की गणना किस तरह की जाती थी और सूर्य-पृथ्वी की गति का इससे क्या संबंध है। पार्क में बाकी नौ साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके पूरा होने के बाद परिसर में विज्ञान और खगोल विज्ञान से जुड़े सिद्धांतों को समझने के लिए एक नया शैक्षणिक आकर्षण तैयार होगा।
छत पर बनेगा ऑब्जर्वेटरी डोम, टेलीस्कोप से दिखेंगे ग्रह
एस्ट्रो पार्क के साथ तारामंडल की छत पर अत्याधुनिक ऑब्जर्वेटरी डोम बनाने की भी प्लानिंग है। इस परियोजना का सबसे खास आकर्षण यहां स्थापित होने वाला जाइंट टेलीस्कोप होगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) की ओर से करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
उच्च क्षमता वाले लेंस और ट्रैकिंग सिस्टम से लैस इस टेलीस्कोप की मदद से सूर्य, चंद्रमा और मंगल, बृहस्पति और शनि जैसे खगोलीय पिंडों को प्रत्यक्ष देखने की सुविधा भी देने की योजना है। इससे लोगों को अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में पढ़ने के साथ उन्हें दूरबीन के माध्यम से देखने का अवसर भी मिल सकेगा।
1.32 करोड़ रुपये से आकार ले रहा प्रोजेक्ट
तारामंडल परिसर में एस्ट्रो पार्क और ऑब्जर्वेटरी डोम के निर्माण पर कुल 1.32 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने हैं। इसमें एस्ट्रो पार्क के लिए 32.56 लाख रुपये और ऑब्जर्वेटरी डोम के लिए 99.71 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को सौंपी गई है। सिविल वर्क चल रहा है। इस परियोजना पर जनवरी 2026 से काम शुरू हुआ था। परियोजना के पूरा होने पर तारामंडल परिसर में खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों और शैक्षणिक अनुभवों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
रोजाना 1500 से अधिक दर्शक पहुंचते हैं तारामंडल
पटना का इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर पहले से ही विज्ञान और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय है। यहां हर दिन करीब 1500 से अधिक दर्शकों के पहुंचने की जानकारी मिली है। तारामंडल में प्रतिदिन संचालित होने वाले आठों शो में भी दर्शकों की अच्छी भीड़ रहती है। इसके अलावा वीआर और दूसरे शो को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।
पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट