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5 साल में 75% तेंदुओं की नसबंदी का प्लान! यूपी में पहली बार शुरू होगा ये काम, क्यों उठाया जा रहा ये स्टेप?

उत्तर प्रदेश में इंसानों और तेंदुओं के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए वन विभाग नई योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत बिजनौर से तेंदुओं के बधियाकरण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। साथ ही फेंसिंग, कैमरा निगरानी और वन्यजीव अस्पताल जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। योजना के नतीजों के आधार पर इसे प्रदेश के दूसरे प्रभावित इलाकों में लागू किया जा सकता है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 24, 2026 पर 9:25 AM
5 साल में 75% तेंदुओं की नसबंदी का प्लान! यूपी में पहली बार शुरू होगा ये काम, क्यों उठाया जा रहा ये स्टेप?
उत्तर प्रदेश में इंसानों और तेंदुओं के बीच टकराव कम करने के लिए बिजनौर से तेंदुओं के बधियाकरण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के साथ फेंसिंग, कैमरा निगरानी और वन्यजीव अस्पताल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

बरेली: उत्तर प्रदेश में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी अब वन विभाग के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। कई इलाकों में तेंदुए जंगलों से निकलकर खेतों और गांवों के आसपास पहुंच रहे हैं, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव का खतरा बढ़ रहा है। इस परेशानी से निपटने के लिए वन विभाग अब एक नई योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत तेंदुओं की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के साथ उनकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इस योजना की शुरुआत बिजनौर से करने की तैयारी है।

इस जिले से होगी तेंदुओं की संख्या नियंत्रित करने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के बिजनौर, पीलीभीत, मुरादाबाद, बरेली, लखीमपुर खीरी, बहराइच और श्रावस्ती जैसे कई जिलों में तेंदुए अब जंगलों से निकलकर खेतों और गांवों के आसपास नजर आने लगे हैं। इनमें बिजनौर सबसे ज्यादा प्रभावित है। वन विभाग के मुताबिक, अभी बिजनौर में करीब 444 तेंदुए हैं और अगले पांच साल में इनकी संख्या बढ़कर करीब 1,336 हो सकती है। इसे रोकने के लिए तेंदुओं का बधियाकरण करने की योजना बनाई गई है। पहले इसे बिजनौर में आजमाया जाएगा और कामयाब रहने पर पूरे प्रदेश में योजना लागू होगी। अगले पांच साल में करीब 75 फीसदी तेंदुओं के बधियाकरण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 310 किलोमीटर इलाके में फेंसिंग, नदियों और रास्तों पर नाइट विजन कैमरे लगाने और कमांड सेंटर से निगरानी करने की भी तैयारी है।

तेंदुओं की सुरक्षा और इलाज के लिए होगी खास व्यवस्था

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