PM DHARA Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि 'PM DHARA' योजना भारत के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्लीन एनर्जी ग्रिड को अपग्रेड करने के लिए तैयार किया गया एक महत्वाकांक्षी लॉन्ग-टर्म प्रोग्राम है।
सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बनने वाली बिजली को देश के कोने-कोने तक सुचारू रूप से पहुंचाने के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है PM DHARA स्कीम और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बिजली का उत्पादन दूरदराज के क्षेत्रों में होता है, लेकिन इसकी खपत औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में होती है। पर्याप्त ट्रांसमिशन लाइनें न होने पर हरित ऊर्जा बर्बाद हो जाती है।
PM DHARA का मुख्य फोकस ग्रिड और स्मार्ट ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है। यह योजना रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स से बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड तक सुरक्षित और बिना किसी नुकसान के पहुंचाने के लिए एक आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी।
₹1,86,405 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। PM DHARA योजना का कुल परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ तय किया गया है। इस विशाल बजट में से ₹54,082 करोड़ की राशि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान करेगी। इस योजना के तहत 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा।
ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए 50 GWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तैनात किया जाएगा, जिससे धूप या हवा न होने पर भी चौबीसों घंटे बिजली की सप्लाई बनी रहे।
योजना का क्रियान्वयन कैसे होगा?
PM DHARA योजना को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी। राज्यों की बिजली ट्रांसमिशन कंपनियां (STUs) इस योजना को लागू करने वाली मुख्य नोडल एजेंसियां होंगी। नई ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण तैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए प्राइवेट और पब्लिक ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा किया जाएगा, जो इन एसेट्स का संचालन और रखरखाव भी करेंगे। मौजूदा ग्रिड नेटवर्क को आधुनिक बनाने और अपग्रेड करने का काम कॉस्ट-प्लस आधार पर किया जाएगा।
2030 तक 500 GW का लक्ष्य और भारत की वैश्विक उपलब्धि
कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत आज ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा अब गैर-जीवाश्म यानी रिन्यूएबल स्रोतों से आता है। दुनिया के बहुत कम देश इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।
सरकार 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त है। वहीं, वर्ष 2035-36 तक इसे बढ़ाकर 786 GW करने की योजना बनाई गई है। यह योजना जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और राज्यों को उनके रिन्यूएबल कंजप्शन ऑब्लिगेशन (RCO) को पूरा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी।