प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे बिजली तो बनेगी ही, साथ ही खाना पकाने और इलेक्ट्रिक गाड़ी चार्ज करने में भी मदद मिलेगी। इससे बिजली बिल कम होगा और देश दूसरे देशों पर कम निर्भर रहेगा।
CNBC-TV18 के अनुसार, प्रधानमंत्री ने 2 नवंबर को दिल्ली में आयोजित India Renewable Energy Summit and Expo 2026 में कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाने से आम लोगों का बिजली बिल घटेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। सोलर अपनाना अब सिर्फ पर्यावरण की जरूरत नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए बचत का सबसे आसान तरीका बन गया है।
समय से 5 साल पहले पूरा किया बड़ा लक्ष्य
समिट में पीएम मोदी ने भारत की बड़ी उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश ने 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का टारगेट तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है। आज भारत दुनिया के टॉप-3 सौर ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है और अब अगले चरण में 500 गीगावाट और ग्रीन एनर्जी जोड़ने की तैयारी है।
PM Surya Ghar Yojana से 76% तक कम हुआ बिजली बिल
पीएम ने बताया कि फरवरी 2024 में शुरू हुई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1 करोड़ घरों में सोलर लगाने का लक्ष्य है। अब तक 65 लाख घरों में पैनल लग चुके हैं। इससे लोगों के बिजली बिल में 76% तक की बचत हो रही है। हर 6 दिन में 1 लाख परिवार सोलर अपना रहे हैं। कई परिवार ज्यादा बिजली बनाकर सरकार को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं।
किसानों को भी मिल रहा सीधा फायदा
पीएम-कुसुम योजना से अब तक 30 लाख किसानों को सोलर सिंचाई पंप मिले हैं। पीएम मोदी ने कहा कि किसान खाली पड़ी जमीन पर भी सोलर पैनल लगा सकते हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ेगी और बिजली का खर्च घटेगा।
सरकारी दफ्तरों में भी सोलर की रोशनी
सरकारी इमारतों, स्कूलों और अस्पतालों में भी तेजी से सोलर लग रहा है। अब तक 44,000 से ज्यादा सरकारी इमारतों पर सोलर सिस्टम लग चुका है, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज से बढ़ेंगे रोजगार
पीएम ने कहा कि 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य है। सौर ऊर्जा को स्टोर करने के लिए बैटरी स्टोरेज बढ़ाना जरूरी है। सोलर कुकर से लेकर EV चार्जिंग तक, इस सेक्टर में युवाओं के लिए लाखों नई नौकरियां बनेंगी। उन्होंने बताया कि ग्रीन एनर्जी में अब तक 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और आगे 220 अरब डॉलर के और मौके हैं।