Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी और महानवमी कब है? ज्योतिषाचार्य से जानें तारीख, मुहूर्त औ नवरात्रि व्रत पारण का समय

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन बहुत से श्रद्धालु कन्या पूजन कर अपने नवरात्रि व्रत का पारण करते हैं। आइए जानें इस साल महाअष्टमी और महानवमी कब होगी, इसके शुभ मुहूर्त और नवरात्रि व्रत पारण किस समय होगा

अपडेटेड Oct 17, 2026 पर 6:53 PM
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सूर्योदय व्यापिनी अष्टमी 19 अक्टूबर को तथा सूर्योदय व्यापिनी नवमी 20 अक्टूबर को है।

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व अब अपने समापन की ओर आ गया है। इस पर्व में महाअष्टमी और महानवमी तिथि का विशेष महत्व है। नवरात्रि में पूरे नौ दिन व्रत करने वाले भक्त इस दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं, जिसे कन्या पूजन या कंजक पूजन कहा जाता है। लेकिन इस साल शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी तिथि की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है कि यह दोनों अहम पर्व किस तारीख को मनाए जाएंगे?

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर, 2026 को प्रातः 8 बजकर 29 मिनट पर प्रारंभ होगी तथा 19 अक्टूबर को प्रातः 10 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी।

इसी तरह, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर, 2026 को प्रातः 10 बजकर 53 मिनट पर प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी अष्टमी 19 अक्टूबर को तथा सूर्योदय व्यापिनी नवमी 20 अक्टूबर को है।

अष्टमी और नवमी का व्रत और कन्या पूजन कब?

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि जो श्रद्धालु अष्टमी के दिन व्रत, पूजन, साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करना चाहते हैं, वे 19 अक्टूबर, सोमवार को ये धार्मिक कार्य कर सकते हैं। वहीं, नवमी के दिन व्रत, पूजन, साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर, मंगलवार को ये अनुष्ठान कर सकते हैं।

विजयदशमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। शस्त्र पूजन का समय 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 52 मिनट के बाद करना शुभ होगा।


कन्या पूजन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 3 से 9 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्या पूजन को नवरात्रि के अनुष्ठान का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। इस दिन श्रद्धालु कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराते हैं और भेंट देकर विदा करते हैं। नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है। इस अवसर पर उन्हें खीर, पूड़ी, हलवा और काले चने का भोग लगाया जाता है।

कन्याओं से इन मंत्रों द्वारा करें प्रार्थना

मंत्र 1

मन्त्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्।

नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्॥

मंत्र 2

जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरूपिणि।

पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥

कन्या पूजन के नौ मंत्र

  • ॐ कुमार्यै नमः।
  • ॐ त्रिमूर्त्यै नमः।
  • ॐ कल्याण्यै नमः।
  • ॐ रोहिण्यै नमः।
  • ॐ कालिकायै नमः।
  • ॐ चण्डिकायै नमः।
  • ॐ शाम्भव्यै नमः।
  • ॐ दुर्गायै नमः।
  • ॐ सुभद्रायै नमः।

नवरात्रि व्रत का पारण

कन्या पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। व्रत खोलने की इस प्रक्रिया को व्रत पारण कहा जाता है। श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक परंपरा, धार्मिक मान्यताओं तथा पंचांग के अनुसार उचित समय पर व्रत का पारण करना चाहिए।

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