आपने कभी सोचा है कि क्या कोई गांव बिकाऊ हो सकता है? महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां पर लिखा है कि "ये गांव बिकाऊ है"। आखिर वहां पर रहने वाले लोगों ने ऐसा पोस्टर क्यों लगाया है। ये पोस्टर सोलापुर के तुलसी गांव में लगा है। यहां पर रहने वाले ग्रामीणों ने गांव में पानी की समस्या की वजह से ये अनोखा पोस्टर लगा कर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि, वे पिछले 25 साल से सिंचाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
गांव के सरपंच शरद मोरे ने तंज कसते हुए कहा कि, अगर कोई उनका गांव खरीदना चाहता है तो आगे आ सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह पोस्टर उनकी नाराजगी और लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या को सामने लाने का एक तरीका है।
25 दिनों से नहीं हुआ बारिश
जिले के रिकॉर्ड के मुताबिक, माढ़ा क्षेत्र के कई गांवों में करीब 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है, जिससे तुलसी गांव में पानी की स्थिति बेहद खराब हो गई है। गांव के जलाशयों में पानी नाममात्र का बचा है, जबकि कई कुएं और परकोलेशन झीलें पूरी तरह सूख चुकी हैं। खास बात ये है कि तुलसी गांव सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना से सिर्फ 9 किलोमीटर दूर है, जिसे साल 2000 में शुरू किया गया था, लेकिन अब तक गांव को इसका लाभ नहीं मिल पाया। आसपास के गांवों में पानी की ज्यादा जरूरत वाली नकदी फसलें उगाई जा रही हैं, जबकि तुलसी के ग्रामीण आज भी बारिश के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं।
तुलसी गांव में पानी की कमी इतनी बढ़ गई है कि ग्रामीणों को जुलाई से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। सरपंच के मुताबिक, मानसून खत्म होने के बाद करीब 2,700 हेक्टेयर खेती की जमीन पर असर पड़ सकता है। समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों ने गणेश चतुर्थी के दिन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी और तहसीलदार को ज्ञापन देकर आत्मदाह की चेतावनी के साथ चुनाव बहिष्कार की बात कही थी।
शुक्रवार को खत्म किया प्रदर्शन
महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल से बातचीत के बाद शुक्रवार को प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। वहीं, सोलापुर के कलेक्टर एस. कार्तिकेयन ने बताया कि सिंचाई विभाग ने गांव का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे पूरा कर लिया है और रिपोर्ट के आधार पर नहर नेटवर्क के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।